
वाराणसी में हुई मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात नक्सली कमांडर बृजेश गंझू की अपराध की लंबी फेहरिस्त सामने आई है। झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के मुखिया बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता पर पुलिस ने 30 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यूपी एटीएस के मुताबिक, वह कई बड़ी वारदातों में शामिल रहा और उसके खिलाफ 44 मुकदमे दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बृजेश गंझू जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिपकर संगठन को मजबूत करता था। उसके नाम से इलाके में ऐसा खौफ था कि शाम के बाद जंगलों में पुलिस की कांबिंग तक चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी।
यूपी एटीएस वाराणसी यूनिट को सूचना मिली थी कि झारखंड का वांछित नक्सली अपने साथियों के साथ सोनभद्र-मिर्जापुर के रास्ते वाराणसी सीमा में प्रवेश करने वाला है। इसी सूचना के आधार पर रविवार तड़के करीब चार बजे रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान के पास एटीएस टीम ने घेराबंदी की। पुलिस के मुताबिक, आमना-सामना होने पर गोलीबारी हुई, जिसमें बृजेश गंझू मारा गया। उसके पास से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, बड़ी संख्या में कारतूस और करीब एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए। उसका एक साथी बाइक से भागने में सफल रहा। मुठभेड़ के दौरान एटीएस वाराणसी यूनिट के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोलियां लगीं, हालांकि दोनों सुरक्षित रहे।
एटीएस के अनुसार, बृजेश गंझू कई गंभीर वारदातों में शामिल रहा था। 9 मार्च 2012 को हंटरगंज के कुसमाही में उसने माओवादी एरिया कमांडर धर्मेंद्र यादव के घर को बम से उड़ाने की घटना को अंजाम दिया था। इसके अलावा लावालौंग-कोलकोले के बीच पुलिस गश्ती दल पर हमला कर हथियार लूटने का भी आरोप उस पर था। इस हमले में बीएमपी-16 के दो जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बृजेश गंझू पर कई हत्या और लेवी वसूली से जुड़े मामले दर्ज थे। 2 फरवरी 2025 को टंडवा के लेम्बुआ जंगल के पास भुनेश्वर साहू की हत्या मामले में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा 18 जुलाई 2018 को पत्थलगड्डा के मेरमगड़ा में मनरेगा ठेकेदार नागेश्वर गंझू की लेवी वसूली के लिए हत्या, 28 नवंबर 2017 को पीपरवार के करमाटांड़ में जेएमएमपी के प्रदीप महतो की हत्या और 2 अप्रैल 2014 को कटकमसांडी के कुसुम्बा में बादल मुंडा और अशोक उरांव की हत्या के मामलों में भी उसका नाम जुड़ा था।
बृजेश गंझू का परिवार स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा है। उसका बड़ा भाई गणेश गंझू सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुका है। उन्होंने 2014 में जेवीएम के टिकट पर चुनाव जीता था। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्यों ने बृजेश गंझू से दूरी बना ली थी। बताया गया कि परिजनों ने भी उसे आत्मसमर्पण करने की सलाह दी थी। 2015 के पंचायत चुनाव में बृजेश गंझू पंचायत समिति सदस्य के रूप में चुनाव जीता था, लेकिन बाद में एनआईए की टेरर फंडिंग जांच के बाद उसकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के सोहवन लुट्टू गांव निवासी बृजेश गंझू करीब दो दशक से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। एटीएस की कार्रवाई के बाद मौके पर फॉरेंसिक टीम ने जांच कर साक्ष्य जुटाए हैं। यूपी के डीजीपी ने इस ऑपरेशन में शामिल एटीएस टीम को दो लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुलिस के मुताबिक, यूपी में पहली बार 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर को मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
Location : Varanasi
Published : 21 September 2026, 5:51 PM IST