
50 साल बाद फिर लौटी मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट (IMG: Dynamite News
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पश्चिमी यूपी की बुढ़ाना विधानसभा सीट फिर चर्चा में है। मुजफ्फरनगर जिले की इस सीट का सियासी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। करीब 50 साल तक चुनावी नक्शे से बाहर रहने के बाद परिसीमन के जरिए बुढ़ाना सीट दोबारा अस्तित्व में आई और इसके बाद हुए तीन विधानसभा चुनावों में तीन अलग-अलग दलों ने जीत दर्ज की। ऐसे में 2027 के चुनाव में यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने की उम्मीद है।
बुढ़ाना विधानसभा सीट पहली बार 1957 में अस्तित्व में आई थी। इसी साल यहां पहला विधानसभा चुनाव भी हुआ। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार कुंवर असगर अली ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के श्री चंद को शिकस्त दी थी। असगर अली को 32,725 वोट मिले, जबकि श्री चंद को 28,425 वोट हासिल हुए थे। इसके बाद 1962 के चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI के विजय पाल सिंह ने बाजी मारी। उन्होंने कांग्रेस के मोहकम सिंह को बड़े अंतर से हराया। विजय पाल सिंह को 45,404 वोट मिले, जबकि मोहकम सिंह को 18,196 वोट मिले थे।
बुढ़ाना की सियासी कहानी में बड़ा मोड़ 1967 के परिसीमन के बाद आया। परिसीमन में इस विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद करीब पांच दशक तक बुढ़ाना अलग विधानसभा सीट के तौर पर चुनावी मैदान में नहीं रही। साल 2008 में नए परिसीमन के बाद बुढ़ाना विधानसभा सीट का दोबारा पुनर्गठन किया गया। इसके बाद 2012 में यहां फिर विधानसभा चुनाव हुए और एक बार फिर इस सीट पर सियासी मुकाबले की शुरुआत हुई।
2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के नवाजिश आलम खान ने जीत हासिल की। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के राजपाल सिंह बालियान को 10,588 वोटों से हराया। आलम खान को 68,210 वोट मिले, जबकि राजपाल सिंह बालियान के खाते में 57,622 वोट आए। इसके बाद 2017 में बीजेपी की लहर का असर बुढ़ाना में भी दिखाई दिया। बीजेपी के उमेश मलिक ने जीत दर्ज की। उन्हें 97,781 वोट मिले। सपा के प्रमोद त्यागी 84,580 वोटों के साथ दूसरे और बसपा की सईदा बेगम 30,034 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
2022 में बुढ़ाना सीट पर एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला। इस बार राष्ट्रीय लोक दल के राजपाल सिंह बालियान ने बीजेपी के उमेश मलिक को 28 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया। राजपाल सिंह बालियान को 1,31,093 वोट मिले, जबकि उमेश मलिक को 1,02,783 वोट मिले। बसपा के अनीस 10,397 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस तरह 2012 में सपा, 2017 में बीजेपी और 2022 में RLD ने जीत दर्ज की। यानी दोबारा अस्तित्व में आने के बाद हुए तीन चुनावों में तीन अलग-अलग दलों का कब्जा रहा।
बुढ़ाना सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो मुस्लिम, जाट और अनुसूचित जाति के मतदाता बेहद अहम माने जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी, जाट मतदाताओं की करीब 20 फीसदी और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की करीब 11 फीसदी है। यानी इन तीनों समूहों की कुल हिस्सेदारी करीब 71 फीसदी बैठती है। यही वजह है कि बुढ़ाना में चुनावी रणनीति बनाने वाले दल इन मतदाताओं के रुझान को बेहद अहम मानते हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में कौन सा दल इस समीकरण को अपने पक्ष में कर पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
Location : Muzaffarnagar
Published : 15 August 2026, 3:25 PM IST