
मिर्जापुर ज़मीन विवाद को लेकर जुटी भीड़ (Img: X)
Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की लालगंज तहसील क्षेत्र के महुलार ग्राम पंचायत के दर्जनों ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर राजधानी लखनऊ पहुंचे। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की जमीन के कथित गलत पट्टे किए जाने, दबंगई और गरीब ग्रामीणों के शोषण का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी तो ग्रामीणों ने प्रमुख सचिव से मिलकर प्रार्थना पत्र सौंपा।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत की जमीन को नियमों के विपरीत तरीके से कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम पट्टे किए गए हैं। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में दबंग और प्रभावशाली लोगों ने आपसी मिलीभगत से काम किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और भूमिहीन गरीब लोगों के अधिकारों को प्रभावित किया गया है। ग्रामीणों ने मांग की कि कथित फर्जी पट्टों की जांच कर उन्हें निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत महुलार में बरकछ, नयागांव, झिगहा, झेलमपुर, गोड़र खुर्द, बढ़ौना, महुलरिया और महुलार समेत कई राजस्व गांव शामिल हैं। इनमें कुछ गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि बरकछ और महुलार में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। नयागांव में अभी चकबंदी नहीं हुई है।
ग्रामीणों का दावा है कि 8 सितंबर 1983 के एक प्रस्ताव के आधार पर 13 फरवरी 1984 को करीब 101 लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। ग्रामीणों ने इन पट्टों की वैधता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों को जमीन का पट्टा दिया गया, उनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पट्टा मिलने के कई साल बाद ग्राम पंचायत में आकर रहने लगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ पट्टाधारक आर्थिक रूप से सक्षम और खेती करने वाले लोग हैं। ऐसे में उन्होंने पट्टा आवंटन की पात्रता और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि राजस्व अभिलेख, पट्टा प्रस्ताव, पात्रता सूची, ग्राम सभा के प्रस्ताव, परिवार रजिस्टर और मतदाता सूची समेत अन्य दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही जमीन पर वास्तविक कब्जे और पट्टा आवंटन की पूरी प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कथित गलत पट्टों का विरोध करने वाले लोगों पर दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि विरोध करने वाले ग्रामीणों को डराने-धमकाने के साथ झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी जाती है। ग्रामीणों ने इसे लेकर अपनी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नियमों के विरुद्ध किए गए पट्टों को निरस्त करने और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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सोमवार को संतोष कुमार, नंद कुमार, लालेश्वर सिंह, रामभरोस, बृजलाल, राधेश्याम समेत दर्जनों ग्रामीण महिला-पुरुष लखनऊ पहुंचे थे। ग्रामीण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी शिकायत रखना चाहते थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने प्रमुख सचिव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को संबोधित प्रार्थना पत्र सौंपा।
ग्रामीणों के मुताबिक, प्रमुख सचिव ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही उन्हें भरोसा दिलाया गया कि नियमों के विपरीत किए गए पट्टा आवंटन और शिकायत में बताए गए अन्य मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि पट्टा आवंटन में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
Location : Mirzapur
Published : 8 September 2026, 4:38 PM IST