हाईवे किनारे गांव, फिर भी विकास गायब! झरने का पानी पी रहे लोग… आखिर कब जागेगा प्रशासन?

मिरजापुर के हलिया ब्लॉक स्थित लहुरिया दह मजरे में ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान बताए जा रहे हैं। करीब 700 से 800 कच्चे मकानों वाले इस गांव में पेयजल, आवास, शौचालय और पेंशन योजनाओं को लेकर सवाल उठे हैं। पंचायत के विकास कार्यों और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग के बीच प्रशासन की भूमिका पर नजरें टिकी हैं।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 26 October 2026, 4:18 PM IST

Mirzapur: मिरजापुर जिले के हलिया ब्लॉक की देवहट कटरा ग्रामसभा के लहुरिया दह मजरे में आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। करीब 700 से 800 कच्चे मकानों वाले इस गांव में ग्रामीणों को पीने के पानी, पक्के आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहाड़ी पर बसे इस गांव की स्थिति ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल उठाती है।

पहाड़ी पर बसे गांव में जिंदगी मुश्किल

लहुरिया दह मजरा देवहट कटरा से लगभग आठ किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में बसा है। दुर्गम रास्तों और सीमित सुविधाओं के बीच यहां के लोगों का जीवन आसान नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में आज भी बड़ी संख्या में कच्चे मकान हैं और कई परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

दावा है कि गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जाएगा।

Jhansi News: समथर नगर पालिका सोती रही, नागरिक ने खुद बनवाई नाली की जाली! शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई?

खाने पीने के लिए पहाड़ों का पानी इस्तेमाल करते हैं लोग (Image Source: Dynamite News)

पीने के पानी के लिए झरने पर निर्भर ग्रामीण

गांव की सबसे बड़ी समस्याओं में पेयजल व्यवस्था शामिल है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों को आज भी पहाड़ी झरने से पानी लेना पड़ता है। स्वजल धारा मिशन के तहत बनी टंकी से तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी मिलने की बात कही गई है। ऐसे में नियमित जलापूर्ति का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भी इस गांव की समस्या को सामने लाया था और यहां पानी पहुंचाने की व्यवस्था की थी। हालांकि, उनके स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में स्थानांतरण के कारणों और किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

रायबरेली: सरेनी में बंद घर के अंदर फंदे से लटका मिला पंचायत मित्र का शव, इलाके में फैली सनसनी

ग्रामीणों को उज्ज्वला योजना और वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। यदि पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

पहाड़ी झरने का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण (Image Source: Dynamite News)

पंचायत के कामकाज और सरकारी योजनाओं पर सवाल

लहुरिया दह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित क्षेत्र में होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। रिपोर्ट में ग्रामसभा के धन के इस्तेमाल और विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और सरकारी जांच की जरूरत है।

ग्राम प्रधान ने कथित तौर पर कहा कि पंचायत के अधिकांश काम ग्राम पंचायत अधिकारी देखते हैं और उन्होंने इस्तीफा देने की इच्छा भी जताई। इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।

अब सवाल यह है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ इस गांव के पात्र परिवारों तक कब पहुंचेगा? जिला प्रशासन को पेयजल, आवास, स्वच्छता और पेंशन योजनाओं की स्थिति की जांच करानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें और कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके।

Location :  Mirzapur

Published :  26 October 2026, 4:17 PM IST