
यूपी में बाढ़ का कहर (IMG: Dynamite News)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बारिश और बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मानसून के दोबारा सक्रिय होते ही प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं और तटवर्ती इलाकों में पानी तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी गांवों में घुसने के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं। परसौंजा गांव में 100 से ज्यादा परिवार बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जबकि 80 से अधिक कच्चे मकान गिर चुके हैं। घरों में रखा अनाज, कपड़े और गृहस्थी का सामान पानी के तेज बहाव में बर्बाद हो गया।
उधर प्रयागराज में गंगा और यमुना का पानी आबादी तक पहुंच गया है। लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। वाराणसी में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यहां वरुणा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जबकि गंगा का जलस्तर भी चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंच गया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने परसौंजा गांव में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के पानी की चपेट में आने से 100 से अधिक परिवार प्रभावित बताए जा रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई परिवारों के सामने रहने और खाने तक का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ के पानी और तेज बहाव के कारण 80 से ज्यादा कच्चे मकानों के गिरने की जानकारी सामने आई है। घरों में रखा अनाज भी पानी में खराब हो गया। लोगों के कपड़े, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें पानी के बहाव में बह गईं।
रामघाट, तरीहा, गोबारिया समेत मानिकपुर के कई गांवों में भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से जलापूर्ति भी ठप हो गई है। बिजली नहीं होने के कारण लोगों के मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मुसीबत के समय बाहरी दुनिया से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है।
प्रयागराज में भी गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगा है। कई जगह लोगों को नाव की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज किए गए हैं। पानी बढ़ने के साथ ही तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है।
प्रयागराज के मांडा क्षेत्र में बाढ़ और तेज बहाव के बीच सोमवार को एक दर्दनाक हादसा भी हो गया। सुरवां दलापुर गांव की पांच किशोरियां कजरी पर्व पर जौ की जरई डुबाने कर्णावती नदी पहुंची थीं। जरई डुबाने के दौरान एक किशोरी तेज बहाव में डूबने लगी। उसे बचाने के लिए बाकी चार किशोरियां भी नदी में आगे बढ़ गईं और तेज धारा की चपेट में आ गईं।
ग्रामीणों ने प्रयास कर तीन किशोरियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन शैलेंद्र मिश्र की 14 वर्षीय बेटी शुभी मिश्रा और राजेश तिवारी उर्फ बबोले की 14 वर्षीय बेटी अर्पिता उर्फ अंकिता तिवारी तेज बहाव में बह गईं। देर शाम तक दोनों किशोरियों का कोई पता नहीं चल सका था। उनकी तलाश के लिए गोताखोरों के साथ PAC की बाढ़ राहत टीम को भी लगाया गया।
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार रात नौ बजे तक गंगा का जलस्तर 70.15 मीटर तक पहुंच गया। यह चेतावनी बिंदु से महज 11 सेंटीमीटर नीचे बताया गया है। वहीं वरुणा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 70.21 मीटर को पार कर 70.95 मीटर तक पहुंच गया है। वरुणा के बढ़ते जलस्तर का असर आसपास के इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। सामनेघाट, पुलकोहना, सलारपुर समेत 10 से ज्यादा तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी बढ़ने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है।
काशी में बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच 361 परिवारों के करीब 1574 लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने की जानकारी सामने आई है। कई परिवार पिछले करीब दो सप्ताह से बाढ़ राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन की नजर तटवर्ती इलाकों पर बनी हुई है। बरसाती और सहायक नदियों में उफान का असर अब गंगा के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
पूर्वांचल के कई इलाकों में गंगा, गोमती और सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। बलिया में गंगा और सरयू के बढ़ते पानी ने तटवर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं बलरामपुर के महराजगंज तराई क्षेत्र के तीन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गाजीपुर में फिलहाल गंगा खतरा बिंदु 63.105 मीटर से नीचे बह रही है, लेकिन यहां भी रविवार शाम एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। सुहवल के डूहिया सरैया के पास गंगा के टापू पर 12 चरवाहे और 2,000 से ज्यादा भेड़ें फंस गई थीं।
बाढ़ के पानी के कारण कई सड़कों पर भी आवाजाही प्रभावित हुई है। गाजीपुर में रेवतीपुर-मां कामाख्या धाम मार्ग पर आवागमन बंद होने की जानकारी है। गोमती नदी में उफान के कारण गौरी-तेतारपुर मार्ग भी पानी में डूब गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही के साथ-साथ जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक रविवार तक प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। करीब 1.70 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक किसी जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है। राहत और बचाव के लिए प्रदेश में कुल 1,633 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। वहीं 525 नाव और मोटरबोट के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव का काम किया जा रहा है।
Location : Lucknow
Published : 1 September 2026, 1:01 PM IST