चार करोड़ का तालाब, तीन बच्चों की मौत और जांच रिपोर्ट; अब EO, JE और लिपिक पर गिरी कार्रवाई की गाज!

महराजगंज के सिसवा बाजार में करीब चार करोड़ रुपये की अमृत सरोवर परियोजना जांच के घेरे में है। कथित भ्रष्टाचार, निर्माण गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर हुई जांच के बाद तत्कालीन EO संदीप कुमार सरोज, JE देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 10 September 2026, 8:09 PM IST
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Maharajganj: करीब चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा अमृत सरोवर अब निर्माण से ज्यादा जांच और कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। सिसवा बाजार नगर पालिका परिषद के मीराबाई नगर वार्ड नंबर-25 में निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, निर्माण की गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हुई जांच के बाद प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। इसके लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। वहीं पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही के मामले में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा से स्पष्टीकरण लिए जाने की संस्तुति भी की गई है।

शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच

पूरा मामला सिसवा बाजार नगर पालिका परिषद के मीराबाई नगर वार्ड नंबर-25 का है। सिसवा बाजार निवासी बृजेन्द्र सिंह ने 18 जुलाई 2026 को प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में भ्रष्टाचार, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी।

तीन अधिकारियों को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी

जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति में उप जिलाधिकारी निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग महराजगंज और उपायुक्त श्रम रोजगार महराजगंज को शामिल किया गया। समिति ने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। इसमें निर्माण कार्य की स्थिति, गुणवत्ता और परियोजना से जुड़े प्रशासनिक एवं वित्तीय पहलुओं को देखा गया।

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तालाब में तीन बच्चों की मौत से बढ़ी गंभीरता

निर्माणाधीन अमृत सरोवर में तीन बच्चों की डूबने से मौत की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया। जांच समिति को तालाब पर हुए निर्माण कार्य के साथ-साथ बच्चों की मौत की दुर्घटना की भी जांच करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। इससे परियोजना से जुड़े निर्माण और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल सामने आए।

22 अगस्त को जिलाधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट

तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 22 अगस्त 2026 को रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। अब इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में परियोजना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

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EO, JE और लिपिक के निलंबन की संस्तुति

जिलाधिकारी कार्यालय के पत्र के अनुसार, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, वर्तमान अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। इन तीनों के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है। यानी अब आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होने की उम्मीद है।

तत्कालीन EO प्रियंका मिश्रा से भी स्पष्टीकरण की संस्तुति

जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई केवल तीन लोगों तक सीमित नहीं है। पर्यवेक्षणीय दायित्वों में घोर लापरवाही बरतने के मामले में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा का स्पष्टीकरण लिए जाने की भी संस्तुति की गई है। वहीं, परियोजना से जुड़े वर्तमान अधिशासी अधिकारी विन्ध्याचल को भी जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया जा चुका है।

Location :  Maharajganj

Published :  10 September 2026, 8:09 PM IST

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