‘प्रोजेक्ट पहचान’ से बदलेगी हजारों बच्चों की जिंदगी! दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान के लिए महराजगंज में महाअभियान शुरू

महराजगंज में शुरू हुआ एक नया अभियान हजारों बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। इस पहल का मकसद ऐसी समस्याओं को समय रहते पहचानना है, जो अक्सर देर से सामने आती हैं। अगर शुरुआत में ही सही कदम उठाए जाएं तो बच्चों का भविष्य बदल सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 July 2026, 7:00 PM IST

Maharajganj: जिले में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग एवं विकासात्मक विलंब से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान और जल्द उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को विकासखंड मिठौरा सभागार सहित जनपद के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर 'प्रोजेक्ट पहचान' के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।

ये रहा कार्यशाला का उद्देश्य

मिठौरा में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया ने कहा कि प्रोजेक्ट पहचान का उद्देश्य छोटे बच्चों में दिव्यांगता एवं विकासात्मक विलंब की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी की मंशा है कि इस अभियान के माध्यम से ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और इसकी मॉनिटरिंग स्वयं जिलाधिकारी द्वारा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा पंचायत स्तर पर कार्यरत सभी कर्मचारियों के बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों से उन्होंने क्षेत्र में प्रभावी ढंग से कार्य करते हुए प्रत्येक पात्र बच्चे की पहचान और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

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क्या बोले अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी?

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में दिव्यांगता की पहचान होने पर समय रहते उपचार, थेरेपी और आवश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप संभव हो जाता है, जिससे उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय सुधार आता है। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से स्क्रीनिंग, रेफरल और नियमित फॉलो-अप को गंभीरता से सुनिश्चित करने की अपील की।

खंड विकास अधिकारी मिठौरा ने कहा कि प्रोजेक्ट पहचान बच्चों के भविष्य को संवारने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसमें आशा संगिनी, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने घर-घर सर्वे कर पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया।

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कार्यशाला में दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में डॉ. अनीता त्रिपाठी ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से 0 से 6 वर्ष के बच्चों में पाई जाने वाली 28 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान, स्क्रीनिंग और रेफरल प्रक्रिया का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बच्चों की जांच, संदिग्ध मामलों की पहचान, अभिभावकों की काउंसलिंग तथा डीईआईसी समेत संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने की जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से घर-घर सर्वेक्षण कर पात्र बच्चों को चिन्हित करने और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने का आह्वान किया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, एमओआईसी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, बीसीपीएम, चिकित्साधिकारी, मुख्यमंत्री फेलो, एएनएम, आशा संगिनी, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Location :  Maharajganj

Published :  30 July 2026, 7:00 PM IST