Magh Mela 2026: प्रयागराज में माघ मेले का आगाज, संगम तट पर उमड़ा आस्था का महासैलाब

पौष पूर्णिमा पर पहला मुख्य स्नान आज शनिवार को महासंगम प्रयागराज में शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं का सैलाब संगम तट पर डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़ा है। पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा जैसे विशेष दिनों में लाखों भक्त स्नान के लिए संगम पर पहुंचते हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 3 January 2026, 4:58 AM IST

प्रयागराज: प्रयागराज में माघ मेला 2026 का शुभारंभ होते ही संगम तट पर आस्था का सैलाब देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। तड़के सुबह से ही संगम घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। संगम तट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं और हर ओर “हर-हर गंगे” के जयघोष गूंज रहे हैं।

जानकारी के अनुसार माघ मेले का शुभारंभ शनिवार, तीन जनवरी से हो गया है। 44 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले के लिए संगम के घाट पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं। पहले मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। मेला अवधि में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है, जबकि करीब 20 लाख कल्पवासी तीन जनवरी से एक फरवरी तक कल्पवास करेंगे।

प्रयागराज का विह्गम दृश्य

ये है मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों के बीच अमृत पाने को लेकर समुद्र मंथन किया गया, तब अमृत की चार बूंदे धरती के चार अलग-अलग स्थानों - हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में गिर गईं। आज इन्हीं स्थानों पर हर 12 साल में कुंभ मेले का आयोजन होता है। वहीं प्रयागराज में हर साल माघ मेले का आयोजन (Magh Mela duration) किया जाता है।

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प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का मिलन होता है, जिसे संगम तट और त्रिवेणी कहा जाता है। पद्म पुराण में लिखित है कि संगम का पानी काफी पवित्र है, जिसमें स्नान करने से पूर्व के पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।

साथ ही जीवन में खुशियों का वास होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, कल्पवासी और धार्मिक गुरु दूर-दूर से संगम में स्नान करने के लिए आते हैं। माना जाता है कि इससे उन्हें मन और इंद्रियों पर नियंत्रण करने की अद्भुत शक्ति मिलती है।

पौष पूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ

पौष पूर्णिमा से कल्पवासियों का व्रत आरंभ हो जाएगा। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों के शिविरों के साथ-साथ प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर पूरी तरह तैयार हैं। शनिवार को प्रथम पुण्य स्नान के साथ संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिलेगा। माघ मेला सदियों पुरानी सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

माघ मेले में पहुंच रहे श्रद्धालु

माघ मेले की प्रमुख तिथियां (Prayagraj snan dates)

3 जनवरी 2026 - पौष पूर्णिमा, माघ मेले और कल्पवास की शुरुआत
14 जनवरी 2026 - मकर संक्रांति, दूसरा प्रमुख शाही स्नान
18 जनवरी 2026 - मौनी अमावस्या, तीसरा प्रमुख स्नान
23 जनवरी 2026 - वसंत पंचमी, चौथा मुख्य स्नान
1 फरवरी 2026 - माघी पूर्णिमा, पांचवां प्रमुख स्नान (कल्पवासियों का मुख्य स्नान)
15 फरवरी 2026 - महाशिवरात्रि, माघ मेले का समापन व अंतिम स्नान

मेला क्षेत्र से लेकर शहर तक अलग-अलग रंगों के संकेतक बोर्ड और हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसों का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन बनाए गए हैं, जबकि सफाई व्यवस्था के लिए 3300 सफाईकर्मी लगाए गए हैं।

सुरक्षा में जुटे पुलिसकर्मी

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। एसपी मेला नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि सुरक्षा के लिए लगभग 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

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श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) की टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया है।

 

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 3 January 2026, 4:58 AM IST