दशहरे पर क्यों खाया जाता है पान? झींझक में पान की दुकानों पर उमड़ी भीड़, बारी के इंतजार में खड़े रहे लोग

कानपुर देहात के झींझक में दशहरे पर पान खाने की परंपरा देखने को मिली। अनंतराम पान पैलेस पर सुबह से लोगों की लंबी कतार लगी रही। जानिए विजयादशमी पर पान खाने को शुभ क्यों माना जाता है।

Post Published By: MOHIT BATHAM KANPUR
Updated : 20 October 2026, 4:16 PM IST
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Kanpur Dehat: दशहरे के दिन रावण दहन और भगवान राम की विजय का जश्न तो आपने खूब देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन पान खाना भी कई जगहों पर शुभ माना जाता है? इसी परंपरा की झलक उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में देखने को मिली, जहां विजयादशमी के मौके पर एक पान की दुकान पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कोई परिवार के साथ पहुंचा, तो कोई दोस्तों के साथ दशहरे की खुशियां मनाने आया। झींझक कस्बे के प्रसिद्ध अनंतराम पान पैलेस पर लगी लंबी कतार ने इस पारंपरिक रिवाज को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

दशहरे पर पान खाने की क्या है परंपरा?

दशहरा यानी विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान राम की रावण पर विजय का उत्सव मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा मनाने के अपने-अपने तरीके हैं। इन्हीं में एक परंपरा विजयादशमी पर पान खाने की भी है। लोक मान्यताओं के अनुसार, पान को विजय, सम्मान, प्रसन्नता और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से कई जगहों पर लोग दशहरे के दिन पूजा-अर्चना के बाद पान खाते हैं।

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पान को शुभ क्यों मानते हैं लोग?

पान का भारतीय संस्कृति में लंबे समय से खास स्थान रहा है। शुभ अवसरों, धार्मिक आयोजनों और अतिथियों के स्वागत में पान का इस्तेमाल किया जाता रहा है। कई पारंपरिक रीति-रिवाजों में इसे सम्मान और मंगल का प्रतीक माना जाता है। पंडित विनायक शुक्ला के अनुसार, विजयादशमी के दिन पान खाने के पीछे लोक मान्यता है कि यह विजय और प्रसन्नता का प्रतीक है। दशहरा स्वयं जीत और उत्सव का पर्व है, इसलिए इस दिन पान खाने की परंपरा को भी शुभता से जोड़कर देखा जाता है।

अनंतराम पान पैलेस पर सुबह से जुटे लोग

कानपुर देहात के झींझक कस्बे में विजयादशमी के मौके पर अनंतराम पान पैलेस पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। दुकान पर पान लेने के लिए लंबी कतार लगी रही। लोग अपनी बारी आने का इंतजार करते हुए नजर आए और इस खास दिन पर पान खाने की परंपरा निभाते दिखे। दुकान के आसपास लोगों की चहल-पहल बनी रही। कोई परिवार के साथ पहुंचा, तो कोई दोस्तों के साथ त्योहार की खुशियां बांटता दिखाई दिया। पान की खुशबू और लोगों की भीड़ ने पूरे माहौल को उत्सव के रंग में रंग दिया।

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परंपराओं से जुड़ा है त्योहारों का उत्साह

भारत में त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके साथ खानपान, स्थानीय रीति-रिवाज और सामाजिक मेलजोल की कई परंपराएं भी जुड़ी हैं। दशहरे पर पान खाने का चलन भी ऐसी ही क्षेत्रीय परंपराओं में से एक है, जिसे लोग अपनी आस्था और मान्यताओं के अनुसार निभाते हैं। झींझक में अनंतराम पान पैलेस पर उमड़ी भीड़ ने दिखाया कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक रिवाज लोगों के बीच अपनी जगह बनाए हुए हैं। विजयादशमी के मौके पर पान खाने की इस परंपरा ने दशहरे के जश्न में एक अलग रंग भर दिया।

Location :  Kanpur Dehat

Published :  20 October 2026, 4:16 PM IST

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