मिर्जापुर के हलिया विकासखंड के कई गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सरकारी दावों के बावजूद ग्रामीणों को जंगल के रास्तों से गुजरना पड़ता है और दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका जीवन कठिन बना हुआ है।

सड़क-पानी-इलाज के लिए आज भी तरस रहे ग्रामीण (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Mirzapur: देश को आजादी मिले करीब 78 वर्ष हो चुके हैं। सरकारें समय-समय पर विकास और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे करती रही हैं, लेकिन मिर्जापुर जिले के हलिया विकासखंड के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कागजों पर भले ही सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की योजनाएं पूरी दिखाई जाती हों, लेकिन हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग है।
हलिया ब्लॉक के दर्जनभर गांवों में पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। लोगों को जंगल के रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। नदना, मतवार, बेलाही और कुसियरा जैसे गांवों तक पहुंचने के लिए लगभग 15 किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता ही एकमात्र सहारा है। चूंकि यह क्षेत्र वन्यजीव क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इस कारण ग्रामीण आज भी मुख्यधारा से कटे हुए हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। इन गांवों में एक भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। मामूली बीमारी के इलाज के लिए भी लोगों को 20 से 25 किलोमीटर दूर हलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। रास्ता खराब होने के कारण समय पर इलाज मिल पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है।
सरकार 'हर घर जल' योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन इन गांवों में लोग आज भी नदियों और तालाबों का पानी पीने को मजबूर हैं। नदना ग्राम सभा में पानी की टंकी और पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन आज तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। गर्मियों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब नदियां भी सूख जाती हैं और लोगों को 4 से 5 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है।
बेसिक जरूरतों के अभाव से परेशान ग्रामीण (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
पीढ़ारिया ग्राम में ग्रामीणों ने बताया कि गांव के प्रधान शहर में रहते हैं और स्थानीय समस्याओं पर ध्यान नहीं देते। पानी जैसी मूलभूत समस्या के समाधान के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे मदद मांगते हैं, तो जिम्मेदार लोग हाथ खड़े कर देते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा, जबकि कागजों में सब कुछ पूरा दिखाया जा रहा है। जांच के नाम पर अधिकारी भी इन क्षेत्रों में नहीं पहुंचते, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
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इन गांवों की स्थिति यह दर्शाती है कि विकास के दावे तब तक अधूरे हैं, जब तक वे जमीनी स्तर पर लागू नहीं होते। सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना ग्रामीणों का जीवन कठिन बना हुआ है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देकर वास्तविक विकास सुनिश्चित करे, ताकि ग्रामीण भी मुख्यधारा से जुड़ सकें।