
प्रतीकात्मक छवि (Img: Pinterest)
Kushinagar: रामकोला थाना क्षेत्र के अमदरिया गांव निवासी अश्वनी मिश्रा की पत्नी मीनाक्षी देवी को 19 अगस्त को प्रसव के लिए सच्चिदानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 20 अगस्त को उन्होंने बच्ची को जन्म दिया।
परिजनों के अनुसार, बच्ची का जन्म सात महीने में हुआ था और जन्म के बाद उसकी हालत लगातार खराब होती गई। अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था, लेकिन सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिवार के लोगों ने अस्पताल परिसर में विरोध शुरू कर दिया।
परिजन डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल को सील करने और जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ धरना लगभग 10 घंटे तक चलता रहा।
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विरोध की सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। कप्तानगंज के थाना प्रभारी विवेक पांडे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। डिप्टी सीएमओ आरडी कुशवाहा ने भी परिवार से बातचीत की।
अधिकारियों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि नवजात की मौत के लिए जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता रामानंद बौद्ध तथा समाजवादी पार्टी के नेता राजेश प्रताप राव 'बंटी' भी परिवार के समर्थन में पहुंचे।
पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम करीब 6 बजे नवजात का शव परिवार को सौंपा गया। इसके बाद परिजन शव लेकर जिला मुख्यालय रवींद्रनगर धूस की ओर पैदल निकल पड़े। रास्ते में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को रोककर समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर कायम रहे।
करीब चार घंटे में उन्होंने 27 किलोमीटर का सफर तय किया और रात लगभग 10 बजे पडरौना के सुभाष चौक पहुंच गए। यहां से जिला मुख्यालय करीब पांच किलोमीटर दूर था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया।
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सुभाष चौक पर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) वैभव मिश्रा और एडिशनल एसपी (ASP) सिद्धार्थ वर्मा पहुंचे। इसके बाद परिवार को स्थानीय पुलिस चौकी पर ले जाकर अधिकारियों ने बातचीत शुरू की।
करीब एक घंटे तक चली चर्चा में प्रशासन ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि 72 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट स्तर से मामले की जांच शुरू कराई जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच में अगर डॉक्टर या अस्पताल की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद परिवार ने अपना विरोध खत्म करने पर सहमति जताई और शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया।
वहीं, अस्पताल की डॉ. मोली पाल ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि बच्ची का जन्म सात महीने में समय से पहले हुआ था। वह बेहद कमजोर थी और उसे अस्पताल में आवश्यक उपचार दिया गया। डॉक्टर के मुताबिक, बच्ची की हालत गंभीर होने के कारण उसकी मौत हुई। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच अहम होगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।
Location : Kushinagar
Published : 25 August 2026, 10:02 AM IST