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दशहरे पर रावण मंदिर में उमड़ी भीड़ (IMG: Dynamite News)
Kanpur: देशभर में विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन जहां जगह-जगह रावण के पुतले के दहन की तैयारियां हो रही हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर में रावण की पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। शहर के शिवाला स्थित फूल मंडी में बने करीब 200 साल पुराने दशानन मंदिर के कपाट दशहरे की सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी।
दशहरे के अवसर पर मंदिर में स्थापित रावण की प्रतिमा का दूध, दही, घी और गंगाजल से अभिषेक किया गया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती हुई। श्रद्धालुओं ने सरसों के तेल के दीपक जलाए और प्रतिमा पर तरोई के फूल अर्पित किए। मान्यता के अनुसार, यहां आने वाले भक्त बच्चों की बुद्धि, बल और विद्या में वृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है कानपुर का रावण मंदिर, दशहरे पर होंगे दर्शन; फिर करना होगा सालभर इंतजार
दशानन मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट साल में केवल विजयादशमी के दिन ही खोले जाते हैं। शाम को आरती के बाद मंदिर के पट फिर बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को अगले साल दशहरे के अवसर पर ही यहां दर्शन करने का मौका मिलेगा। मंदिर की यही अनूठी परंपरा हर साल लोगों को आकर्षित करती है। दशहरे के दिन यहां दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं।
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन कानपुर के इस मंदिर में रावण की पूजा की परंपरा एक अलग धार्मिक स्वरूप पेश करती है। मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का कहना है कि रावण विद्वान था, लेकिन उसके भीतर अहंकार था। उनके मुताबिक, दशहरे पर रावण के पुतले के साथ अहंकार और बुराइयों के अंत का संदेश भी जुड़ा है। भक्तों ने मंदिर में प्रार्थना की कि उनके भीतर मौजूद बुराइयां दूर हों और उन्हें सद्बुद्धि मिले।
Location : Kanpur
Published : 20 October 2026, 2:03 PM IST
Topics : Dussehra 2026 Kanpur Dashanan Temple Kanpur Ravan Temple Shivala Kanpur Temple Vijayadashami Celebration