
तीर-धनुष लेकर सड़कों पर उतरा समाज (IMG: Dynamite News)
Chandauli: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रविवार को चंदौली में आदिवासी समाज की ताकत और संस्कृति का अलग ही रंग देखने को मिला। चकिया त्रिमुहानी से निकले भव्य जागरूकता जुलूस में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। किसी के हाथ में तीर-धनुष था तो कोई पारंपरिक वेशभूषा में नजर आया। ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच निकले इस जुलूस ने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और वनाधिकार जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।
चकिया त्रिमुहानी से शुरू हुआ जागरूकता जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ा। जुलूस में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा पहन रखी थी। कई लोगों के हाथों में तीर-धनुष नजर आया, जिसने आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान और संस्कृति की झलक पेश की। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल रहे। रास्ते में लोगों ने आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखा। जुलूस का उद्देश्य केवल अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि समाज के सामने मौजूद अधिकारों और समस्याओं को भी मजबूती से उठाना था।
जुलूस के बाद सुभाष पार्क में सभा का आयोजन किया गया। सभा में आदिवासी समाज से जुड़े लोगों और वक्ताओं ने अपने अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की। सबसे प्रमुख मुद्दा जल, जंगल और जमीन का रहा। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन लंबे समय से जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। ऐसे में उन्हें उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में गोंड, खरवार, चेरो, पनिका समेत विभिन्न जनजातीय समुदायों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने मांग की कि पात्र परिवारों को वनाधिकार कानून के तहत उनके अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में आदिवासी समाज की भागीदारी और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सरकार के सामने कई मांगें भी रखी गईं। आदिवासी समाज ने चंदौली का नाम महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने की मांग प्रमुखता से उठाई। महारानी दुर्गावती को आदिवासी समाज की वीरांगना के रूप में याद किया जाता है। कार्यक्रम में उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उनके सम्मान में चंदौली का नाम रखने की मांग की गई।
सभा के दौरान आदिवासी समाज के महापुरुषों और वीर योद्धाओं के संघर्ष को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने देश और समाज के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए कई पीढ़ियों ने अपना जीवन संघर्ष में बिताया। ऐसे में उनके बलिदान और योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र में भी भव्य जागरूकता जुलूस निकाला गया। यहां भी आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। जुलूसों के माध्यम से लोगों को समाज की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
Location : Chandauli
Published : 9 August 2026, 4:44 PM IST