700 करोड़ का ‘सट्टा’ और मुंबई का ‘सीक्रेट कोड’, यूपी के युवाओं को ऐसे ठगा जा रहा था

आईपीएल सट्टेबाजी के नाम पर देशभर में 700 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की जांच तेज हो गई है। यह नेटवर्क सोशल मीडिया विज्ञापनों और मुंबई की एक फर्जी फर्म के जरिए 2,000 से अधिक बैंक खातों का उपयोग कर संचालित हो रहा था। ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और रियल एस्टेट में निवेश करने की आशंका है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 1 July 2026, 7:27 PM IST
google-preferred

Varanasi: आईपीएल सट्टेबाजी के नाम पर देशभर के लोगों से कथित तौर पर करीब 700 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। साइबर क्राइम पुलिस की शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन सोशल मीडिया विज्ञापनों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि मुंबई की एक कथित मलिक फर्म के माध्यम से हजारों बैंक खातों का इस्तेमाल कर रकम को इधर-उधर भेजा गया।

2000 से ज्यादा खातों से हुआ लेनदेन

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक गिरोह ने करीब 2,000 बैंक खातों का उपयोग कर पैसों का लेनदेन किया। केवल मई महीने में ही करीब 25 करोड़ रुपये 300 से अधिक खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशों, खासकर खाड़ी देशों तक पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, हवाला नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश, मुंबई, हरियाणा और दिल्ली में भी धन भेजे जाने के संकेत मिले हैं।

छापेमारी में खुली थी साजिश की परतें

मामले का खुलासा एक जून को हुई कार्रवाई के दौरान हुआ था, जब कैंट पुलिस और क्राइम ब्रांच ने टकटकपुर स्थित एक अपार्टमेंट में छापा मारकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मौके से करीब एक करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी संपत्ति भी बरामद की गई थी। बैंक खातों की जांच में पता चला कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से ऑनलाइन सट्टेबाजी के नाम पर लोगों से रकम जुटा रहा था।

Varanasi: आग ने मचाई तबाही! CNG पंप यार्ड हादसे की जांच में जुटी दिल्ली की टीम

मुंबई में दी गई थी विशेष ट्रेनिंग

जांच एजेंसियों के अनुसार, मुख्य आरोपी रितेश दिवाकर शुक्ला लंबे समय तक मुंबई में रहकर साइबर ठगों के संपर्क में आया था। आरोप है कि मुंबई में कुछ लोगों को करीब 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर और अन्य जिलों के युवकों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया।

रियल एस्टेट में भी लगाया गया पैसा

जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में निवेश किया गया। लखनऊ, वाराणसी और कानपुर समेत कई शहरों में निवेश के सुराग मिले हैं। साइबर क्राइम पुलिस अब बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट और कथित मलिक फर्म से जुड़े लोगों की पहचान में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जेल में बंद आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क और उसके विदेशी कनेक्शन का खुलासा हो सके।

Location :  Varanasi

Published :  1 July 2026, 7:27 PM IST

Related News

No related posts found.

Advertisement