सिर पर टोपी, हाथों में तिरंगा… जुबां पर भारत माता की जय, मुजफ्फरनगर के मदरसों में शान से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

मुजफ्फरनगर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मदरसों में भी देशभक्ति का रंग देखने को मिला। मदरसा महमूदिया सरवट में झंडारोहण के बाद छात्र-छात्राओं ने तिरंगा हाथ में लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए। मदरसे के मुफ्तियों ने बच्चों को आजादी की लड़ाई और देश के लिए दी गई कुर्बानियों के किस्से सुनाए। यहां धार्मिक शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर की पढ़ाई पर भी जोर दिया जाता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 August 2026, 1:07 PM IST

Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर माहौल पूरी तरह देशभक्ति से सराबोर नजर आया। शहर के मदरसा महमूदिया सरवट में 15 अगस्त का जश्न पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। सिर पर टोपी, हाथों में तिरंगा और जुबां पर भारत माता की जय के नारों के बीच मदरसे में ध्वजारोहण किया गया। झंडा फहरते ही पूरा परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।

मदरसे में हर साल मनाया जाता स्वतंत्रता दिवस

मदरसा महमूदिया सरवट की अपनी एक पुरानी पहचान है। बताया जाता है कि यह मदरसा करीब 110 साल पुराना है। मदरसे से जुड़े लोगों के मुताबिक स्थापना के समय से ही यहां राष्ट्रीय पर्वों को पूरी शान के साथ मनाने की परंपरा रही है। हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के मौके पर यहां ध्वजारोहण किया जाता है। इसके साथ ही बच्चों को देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई जाती हैं।

बच्चों को सुनाए आजादी की लड़ाई के किस्से

कार्यक्रम के दौरान मदरसे के मुफ्तियों ने छात्र-छात्राओं को देश की आजादी के संघर्ष से जुड़े किस्से सुनाए। बच्चों को बताया गया कि देश को आजादी आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए हजारों लोगों ने संघर्ष किया और कुर्बानियां दीं। मुफ्तियों ने बच्चों से कहा कि देश की सुरक्षा और तरक्की के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जब भी देश के सामने कोई मुश्किल या संकट आए तो नागरिकों को एकजुट होकर देश के साथ खड़ा रहना चाहिए।

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'एक हाथ में कुरान तो दूसरे हाथ में कंप्यूटर'

मदरसा महमूदिया सरवट के मुफ्ती मोहम्मद जाहिद ने बताया कि संस्थान में लंबे समय से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाया जाता रहा है। उनके मुताबिक इस बार भी 15 अगस्त का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मदरसे के शिक्षक, छात्र और क्षेत्र के लोग शामिल हुए। मुफ्ती मोहम्मद जाहिद ने कहा कि मदरसा करीब 110 साल पहले स्थापित हुआ था। उनके अनुसार इसकी बुनियाद हजरत शेखुनिदअलरहमत अली के आदेश पर मौलाना अशरफ अली थानवी ने रखी थी। उन्होंने यह भी बताया कि मदरसे से जुड़े कई लोग स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे और देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।

उर्दू-अरबी के साथ हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई

मदरसा महमूदिया सरवट में सिर्फ धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि आधुनिक शिक्षा पर भी जोर दिया जाता है। यहां छात्र-छात्राओं को उर्दू और अरबी के साथ हिंदी और अंग्रेजी भी पढ़ाई जाती है। मदरसे के मुफ्ती के मुताबिक आज के समय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना भी जरूरी है। इसी सोच के तहत कंप्यूटर शिक्षा को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है।

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देश के लिए हमेशा तैयार रहने का संदेश

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में देश की सुरक्षा और एकता को लेकर भी संदेश दिया गया। मुफ्ती मोहम्मद जाहिद ने कहा कि देश के हर नागरिक को मुल्क की हिफाजत के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने आजादी के आंदोलन में अपने बुजुर्गों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए पहले लोगों ने बड़ी कुर्बानियां दीं। आज जरूरत है कि नई पीढ़ी भी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे।

देशभक्ति के रंग में रंगा मदरसा

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मदरसा महमूदिया सरवट का पूरा परिसर तिरंगे और देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। झंडारोहण के बाद देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। मदरसे के शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि आजादी सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  15 August 2026, 1:07 PM IST