IAS अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घूसखोरी केस किया रद्द

हाई कोर्ट ने इस मामले में निकांत जैन के खिलाफ दर्ज पुलिस केस खारिज कर दिया है। हालांकि, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए सरोजिनी नगर के भटगांव में हुए ₹20 करोड़ के ज़मीन अधिग्रहण घोटाले में अभिषेक प्रकाश की किस्मत अभी भी पक्की नहीं है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 February 2026, 12:50 PM IST

Lucknow: रिश्वत के आरोप में सस्पेंड हुए IAS ऑफिसर अभिषेक प्रकाश अब अपने पद पर वापस आ सकते हैं।

हाई कोर्ट ने इस मामले में निकांत जैन के खिलाफ दर्ज पुलिस केस खारिज कर दिया है। हालांकि, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए सरोजिनी नगर के भटगांव में हुए ₹20 करोड़ के ज़मीन अधिग्रहण घोटाले में अभिषेक प्रकाश की किस्मत अभी भी पक्की नहीं है।

पिछले साल 20 मार्च को, SEAL Solar P6 Private Limited के एक अधिकारी विश्वजीत दत्ता की शिकायत के बाद सरकार ने अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया था। पुलिस ने उनके करीबी साथी निकांत जैन को भी गिरफ्तार किया था।

गोमती नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस

गोमती नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस के आधार पर, पुलिस ने निकांत जैन और प्रकाश के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की जांच शुरू की, लेकिन सरकार ने जांच के लिए एक SIT बना दी।

FIR में अभिषेक का नाम दर्ज करने के बजाय, पुलिस ने निकांत जैन और इन्वेस्ट UP के एक अधिकारी का नाम दर्ज किया। केस खारिज होने से अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं।

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विजिलेंस और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) अभी भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे हैं। वह सरोजनी नगर के भटगांव में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ज़मीन खरीदने से जुड़े ₹20 करोड़ के घोटाले में भी फंसे हैं।

सरकार ने इस मामले की जांच रेवेन्यू काउंसिल के उस समय के चेयरमैन डॉ. रजनीश दुबे से करवाई थी। अगस्त 2024 में सरकार को सौंपी गई 83 पेज की जांच रिपोर्ट में अभिषेक प्रकाश और 18 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। भू-माफिया ने अधिकारियों से साठगांठ करके नॉन-ट्रांसफरेबल ज़मीन को ट्रांसफरेबल घोषित करवा लिया था।

मालिकाना हक वेरिफाई किए बिना मुआवजा

जांच में पता चला कि 90 पट्टे फर्जी थे। इनमें से 11 लोगों के नाम तो पट्टों पर दर्ज ही नहीं थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने मालिकाना हक वेरिफाई किए बिना मुआवजा बांट दिया।

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पूरे मामले की जांच में अभिषेक प्रकाश के साथ उस समय के ADM, चार SDM, चार तहसीलदार, एक नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो और दो लेखपाल दोषी पाए गए।

सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

ज़मीन अधिग्रहण के समय लखनऊ के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रहे अभिषेक प्रकाश को छोड़कर सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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  • Lucknow

Published : 
  • 11 February 2026, 12:50 PM IST