
हाथरस में मिसाल बनी इंसानियत (Img: Dynamite News)
Hathras: पहचान भले ही अज्ञात हो, लेकिन इंसान की गरिमा अज्ञात नहीं हो सकती। इसी मानवीय भावना के साथ एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (ADHR) की ओर से अज्ञात एवं लावारिस शवों का धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कराने का सिलसिला जारी है।
20 अगस्त को हाथरस के तालाब चौराहा के पास करीब 32 वर्षीय अज्ञात युवक का शव मिला था। युवक ने काले रंग की हाफ पैंट पहन रखी थी। पुलिस ने शव को शिनाख्त के लिए निर्धारित 72 घंटे तक सुरक्षित रखा, लेकिन पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस ने शव को लावारिस घोषित करते हुए पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई।
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पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने अज्ञात शव के अंतिम संस्कार के लिए समाजसेवी सुनीत आर्य और प्रवीन वार्ष्णेय से सहयोग का अनुरोध किया। समाजसेवियों ने मानवता और सामाजिक दायित्व का परिचय देते हुए शव का हिंदू रीति-रिवाज एवं धार्मिक विधि-विधान के अनुसार अंतिम संस्कार कराया।
समाजसेवियों ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान भले ही अज्ञात हो, लेकिन मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई उसका मानवीय अधिकार है। मृत व्यक्ति की गरिमा और सम्मान बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। मानवाधिकार केवल जीवित व्यक्ति के अधिकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना भी मानवीय संवेदनशीलता का हिस्सा है।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था ADHR की देखरेख में समाजसेवी सुनीत आर्य के नेतृत्व में की गई। इसमें NSS अध्यक्ष सुनील अग्रवाल का भी सहयोग रहा। इस दौरान ADHR के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय, समाजसेवी सुनीत आर्य, NSS अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, आयोग दीपक, बंटी भाई कपड़े वाले, नीरज गोयल, तरुण राघव, कांस्टेबल पवन कुमार और हेड कांस्टेबल निहाल सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
Location : Hathras
Published : 24 August 2026, 12:28 PM IST
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