“पापा अंदर फंस गए हैं, तू जल्दी आ”: ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड में बेबस पत्नी चिल्लाती रही और जिंदा जल गया पति

ग्रेटर नोएडा स्लीपर बस हादसे की दिल दहला देने वाली दास्तान! सास की चिता तक पहुंचने से पहले रेखा के पति की जिंदा जलकर मौत। जानिए प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी उस खौफनाक रात का पूरा सच।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 September 2026, 8:22 AM IST

Greater Noida: जिंदगी कब और किस मोड़ पर ऐसा क्रूर खेल खेल जाएगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। महोबा में अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे हिसार निवासी देवेंद्र भारद्वाज और उनकी पत्नी रेखा के लिए यह रात आखिरी साबित हुई। दोनों स्लीपर बस में सवार होकर अपने गृह नगर लौट रहे थे। रात करीब 11:30 बजे जैसे ही बस ग्रेटर नोएडा के पास पहुंची, अचानक लपटों में घिर गई।

रेखा किसी तरह हिम्मत जुटाकर बाहर निकल आईं, लेकिन कुछ समय पहले हुए हादसे के कारण देवेंद्र के पैर में लोहे की रॉड लगी हुई थी। वह तेजी से हिल-डुल नहीं सके और बस के अंदर ही फंस गए। बाहर खड़ी रेखा बिलखती रही, चीखती रही, लेकिन आग की उठती भयानक लपटों ने किसी को अंदर जाने नहीं दिया और देखते ही देखते देवेंद्र जिंदा जल गए।

"पापा अंदर फंस गए हैं, तू जल्दी कैब लेकर आ जा"

इसी बस हादसे में उरई के हरिशरण गुप्ता की भी दर्दनाक मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर उनकी बेटी राधिका हाथ में पिता की फोटो लिए हर आने-जाने वाले को दिखाकर उनसे मिलवाने की गुहार लगा रही थी।

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उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसके पिता का शव झुलसी हालत में डीप फ्रीजर में रखा जा चुका है। राधिका के 17 वर्षीय भाई ओम गुप्ता ने रात ढाई बजे उरई में अपनी बहन को फोन कर रोते हुए कहा था- "बहन, बस में आग लग गई है और पापा अंदर फंस गए हैं, तू जल्दी कैब लेकर यहां आ जा।"

ड्राइवर-परिचालक फरार, यात्री बने देवदूत

हादसे के समय बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे। बस में सवार यात्री हासिर ने बताया कि नोएडा से महज 30-40 किलोमीटर आगे बढ़ते ही अचानक धुआं भरने लगा और बस झटके से रुक गई। जब यात्री आगे की तरफ भागे तो ड्राइवर और क्लीनर गाड़ी छोड़कर पहले ही रफूचक्कर हो चुके थे।

आगे बैठे लोग किसी तरह जान बचाकर निकले, लेकिन पीछे की सीट पर सो रहे 6 से 7 लोग बाहर नहीं निकल सके। हासिर और कुछ स्थानीय युवाओं ने अपनी जान पर खेलकर करीब 14 यात्रियों को बाहर निकाला।

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डेढ़ घंटे बाद पहुंची राहत टीम, खड़े हुए गंभीर सवाल

घटना के बाद करीब डेढ़ घंटे तक चीख-पुकार मचती रही, लेकिन पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीम वक्त पर नहीं पहुंच सकी। अगर राहत दल कुछ मिनट पहले पहुंच जाता, तो शायद देवेंद्र और हरिशरण जैसे कई मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।

इस दर्दनाक अग्निकांड ने न केवल कई परिवारों को जिंदगी भर का जख्म दिया है, बल्कि स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Location :  Greater Noida

Published :  25 September 2026, 8:22 AM IST