
ग्रेटर नोएडा स्लीपर बस मामला (Image: Social Media)
Noida News: ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस के अंदर 16 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप के आरोपों ने यात्री सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रात के समय छात्रा परी चौक तक कैसे पहुंची और वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। बीटा-2 थाना पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा बस में परी चौक से सवार हुई थी या इससे पहले किसी दूसरे स्थान से बस तक पहुंची थी।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए परी चौक और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि छात्रा किस रास्ते से परी चौक पहुंची और वहां कितनी देर तक मौजूद रही? पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि छात्रा यमुना एक्सप्रेसवे पर किसी बस से उतरने के बाद जीरो पॉइंट पहुंची होगी। इसके बाद नोएडा सेक्टर-62 जाने के लिए वाहन का इंतजार करते हुए वह परी चौक पहुंची हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो जीरो पॉइंट से परी चौक तक के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे पुलिस के लिए अहम सबूत साबित हो सकते हैं।
घटना के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर छात्रा रात में अकेली परी चौक पहुंची थी तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों या सुरक्षा व्यवस्था की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी? परी चौक जैसे व्यस्त इलाके में रात के समय यात्रियों की आवाजाही रहती है, ऐसे में सुरक्षा निगरानी को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
परी चौक और कसाना क्षेत्र में स्लीपर बसों के रुककर सवारी भरने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। कई बसें ऑनलाइन बुकिंग के जरिए यात्रियों को यहां से बैठाती हैं। लेकिन इन बसों की नियमित जांच और निगरानी को लेकर सवाल बने हुए हैं। इनमें से कई बसें दिल्ली के कश्मीरी गेट और आनंद विहार जैसे इलाकों से चलकर एक्सप्रेसवे के रास्ते पूर्वांचल और बिहार तक जाती हैं। आरोप है कि कई स्लीपर बसों में काले शीशे और पर्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे अंदर की गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है।
घटना के बाद बस चालक और परिचालक के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए ड्राइवर और कंडक्टर का रिकॉर्ड जांचना कितना जरूरी है, यह मामला एक बार फिर सामने ले आया है। सवाल यह है कि अगर बसों की नियमित जांच और कर्मचारियों का सत्यापन होता तो क्या ऐसी वारदात को रोका जा सकता था।
जिस स्लीपर बस में छात्रा से गैंगरेप का आरोप है, वह ट्रैवल कंपनी नोएडा सेक्टर-44 छलेरा इलाके से संचालित होती थी। मामला सामने आने के बाद कंपनी ने अपना ऑफिस बंद कर दिया है और बाहर लगा होर्डिंग भी हटा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, कंपनी इसी ऑफिस से दिल्ली-एनसीआर में अपनी बसों का संचालन देखती थी। हालांकि घटना वाले दिन बस सेक्टर-44 स्थित ऑफिस नहीं पहुंची थी।
स्लीपर बसों में लगे पर्दे और गहरे शीशे लंबे समय से सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय रहे हैं। बाहर से बस के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। अब इस घटना के बाद ऐसे सुरक्षा मानकों की जांच और सख्ती की मांग तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, बस की जानकारी और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। पूरे मामले में आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की उम्मीद है।
Location : Greater Noida
Published : 1 September 2026, 2:16 PM IST