गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे किनारे पौधों को नुकसान से बचाने को लेकर वन दरोगा और चरवाहों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विवाद बढ़ने पर अभद्रता और हाथापाई की आशंका जताई गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। तहरीर में हमले का जिक्र नहीं है, लेकिन पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। वन विभाग भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।

पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर विवाद
Gorakhpur: जिले के खजनी क्षेत्र में पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे किनारे लगाए गए पौधों को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया। सहजनवा रेंज के वन दरोगा अभिषेक तिवारी टीम के साथ निरीक्षण पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने देखा कि एक्सप्रेसवे किनारे लगाए गए पौधों को चर रहे मवेशियों से नुकसान हो रहा है। बताया जा रहा है कि जिस स्थल पर प्रदेश के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्वयं पौधारोपण किया था, वहीं पौधे सबसे अधिक प्रभावित मिले। इसे लेकर वनकर्मी नाराज हो गए और चरवाहों से तुरंत जानवर हटाने को कहा।
वन दरोगा की आपत्ति पर चरवाहों और वनकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद के दौरान वन दरोगा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। स्थिति कुछ देर के लिए इतनी बिगड़ गई कि हाथापाई की आशंका जताई जाने लगी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे।
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घटना की सूचना मिलते ही खजनी थाना प्रभारी जयंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर समझाया और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दी गई तहरीर में वन दरोगा पर हमले का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन अभद्रता की बात सामने आई है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है, लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर मवेशी पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग ने भी स्वीकार किया है कि नियमित निगरानी की आवश्यकता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पौधों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद और नुकसान से बचा जा सके। फिलहाल पुलिस और वन विभाग दोनों ही अपने-अपने स्तर पर जांच में जुटे हैं।+