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गोरखपुर कोर्ट ने सुनाई सजा
Gorakhpur: वर्ष 2009 में थाना शाहपुर में दर्ज हत्या के प्रयास के 17 साल पुराने मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय गोरखपुर ने चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। लंबे समय से लंबित इस मामले में सजा होने के बाद पुलिस की प्रभावी पैरवी और मुकदमे की लगातार मॉनिटरिंग को अहम माना जा रहा है।
मामला शाहपुर थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 712/2009 से जुड़ा है। अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 323, 504, 506, 325, 324 और 307 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और पुलिस की प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को दोषी पाया।
सजा पाने वालों में अब्दुल कलाम उर्फ दुलाम पुत्र मुजाहीद, असमल खां पुत्र मुजाहीद, इस्तयाक उर्फ संजय पुत्र मुजाहीद और मोहम्मदीन पुत्र अनवर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार चारों अभियुक्त करमैनी, थाना पिपराइच, जनपद गोरखपुर के निवासी हैं।
पुलिस विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत इस मुकदमे की लगातार मॉनिटरिंग की गई।
थाना पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराया। अभियोजन पक्ष की ओर से भी मामले की मजबूती से पैरवी की गई।
न्यायालय के फैसले में चारों अभियुक्तों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक को 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में दोषसिद्धि कराने में डीजीसी प्रियानन्द सिंह और एडीजीसी जयनाथ यादव का भी योगदान रहा।
17 साल पुराने इस मामले में आए फैसले को पुलिस की लंबित गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन कनविक्शन के तहत पुराने मामलों की नियमित मॉनिटरिंग कर अभियोजन की कार्रवाई को मजबूत किया जा रहा है,
Location : Gorakhpur
Published : 25 September 2026, 1:47 AM IST