
गोरखपुर में सिस्टम की सुस्ती पर महिला के लाठीतंत्र का कड़ा प्रहार (सोर्स- रिपोर्टर)
Gorakhpur: जब लोकतंत्र के सारे चौखट-ग्राम प्रधान, समाधान दिवस, पुलिस थाना, एसडीएम, जिलाधिकारी और मंडलायुक्त तक सिर्फ आश्वासनों की पोटली बनकर रह जाएं, तो एक आम नागरिक का धैर्य किस हद तक टूट सकता है, इसकी बानगी गोरखपुर की खजनी तहसील में देखने को मिली।
सिकरीगंज क्षेत्र के ढाडी जोत गांव की पुष्पा देवी जब हाथ में मोटा डंडा लेकर तहसील परिसर में दाखिल हुईं, तो वह सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ एक जीता-जागता विद्रोह थीं। उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी फाइलें दफ्तरों में सो जाती हैं, तो जनता को अपनी आवाज सुनाने के लिए लीक से हटकर रास्ता चुनना पड़ता है।
पुष्पा देवी का गुस्सा बेवजह नहीं था। उनका आरोप है कि उनके घर के सामने स्थित सरकारी चकनाली पर एक सेवानिवृत्त लेखपाल ने अवैध कब्जा कर लिया है, जिससे उनका मुख्य रास्ता पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इस सरकारी भूमि की पैमाइश के लिए वह महीनों से राजस्व विभाग के चक्कर काट रही थीं।
बात सिर्फ इतनी नहीं है; महिला ने संबंधित राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) पर पैमाइश करने के नाम पर नकद रुपये ऐंठने का भी गंभीर आरोप लगाया है। पैसे लेने के बावजूद जब कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो पीड़ित महिला का सब्र का बांध टूट गया।
डंडा हाथ में लिए पुष्पा देवी जब कानूनगो को तलाशते हुए तहसील के विभिन्न कमरों में दहाड़ रही थीं, तो वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। 'इंसाफ दो या सामना करो' की इस खुली चुनौती से राजस्व कर्मी इस कदर सहम गए कि उन्होंने आरोपी कानूनगो अवधेश प्रसाद को आनन-फानन में सभागार कक्ष के भीतर भेजा और बाहर से कुंडी लगा दी। करीब आधे घंटे तक तहसील परिसर में यह अफरा-तफरी मची रही, जहां एक अकेली महिला के आक्रोश के सामने पूरा प्रशासनिक अमला बेबस नजर आया।
जो काम महीनों की अर्जियों और गुहार से नहीं हो सका, वह महिला के इस आक्रामक रुख के बाद महज कुछ मिनटों में हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही एसडीएम खजनी आनंद कुमार कटारिया मौके पर दौड़े चले आए। उन्होंने महिला को शांत कराया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक्शन मोड में आ गए।
एसडीएम ने तत्काल नायब तहसीलदार जाकिर हुसैन के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित कर दी और निर्देश दिया कि शुक्रवार को ही मौके पर जाकर विवादित भूमि और सरकारी चकनाली की पैमाइश की जाए।
दूसरी तरफ, आरोपी राजस्व निरीक्षक अवधेश प्रसाद ने इन तमाम आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि महिला उन पर सरकारी नाले की भूमि को गलत तरीके से नापने का अनुचित दबाव बना रही है।
सच चाहे जो भी हो, लेकिन इस घटना ने उत्तर प्रदेश सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' और त्वरित जनसुनवाई के दावों की पोल खोलकर रख दी है। यह वाकया साफ तौर पर संदेश देता है कि यदि जमीनी स्तर पर जनता की शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं हुआ, तो जंतर-मंतर जैसे धरने अब तहसील के भीतर लाठियों के रूप में दिखाई देंगे।
Location : Gorakhpur
Published : 16 July 2026, 5:37 PM IST
Topics : Gorakhpur News land dispute UP News UP Police