
गोरखपुर पुलिस की पैरवी लाई रंग
Gorakhpur: करीब 21 साल पुराने हत्याकांड में गोरखपुर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी दोषियों पर कुल 59 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वर्ष 2005 में पीपीगंज थाने में दर्ज हत्या के मुकदमे में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है।
पुलिस की प्रभावी पैरवी और मॉनिटरिंग सेल की सक्रियता से अभियुक्तों को सजा दिलाने में सफलता मिली।
पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत पुराने गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए लगातार पैरवी की जा रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में पीपीगंज थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने मुकदमे की प्रभावी पैरवी की।
मामला पीपीगंज थाने में वर्ष 2005 में दर्ज मुकदमा संख्या 490/05 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड विधान की धारा 148, 302, 149 और 307 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोरखपुर की अदालत में हुई। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद सातों अभियुक्तों को दोषी पाया और आजीवन कारावास के साथ 59 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
सजा पाने वालों में पीपीगंज थाना क्षेत्र के फुलवरिया गांव निवासी राजेश यादव पुत्र लालचंद, रामलौट पुत्र गंगा, सिंटू पुत्र विशंभर, रामजी उर्फ रामजीत पुत्र रामलखन, शेषनाथ यादव पुत्र साधू यादव, मुक्तेश्वर पुत्र साधू यादव और बृजेश तिवारी पुत्र विशंभर तिवारी शामिल हैं।
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इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी प्रियानंद सिंह और एडीजीसी जयनाथ यादव ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस विभाग ने मुकदमे में दोषसिद्धि का श्रेय थाने के पैरोकार, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष के समन्वित प्रयासों को दिया है।
Location : Gorakhpur
Published : 1 November 2026, 1:57 AM IST