गोरखपुर के गोला क्षेत्र में सड़क हादसे में शिक्षक की मौत के बाद SBI गोला शाखा ने सैलरी पैकेज बीमा योजना के तहत पत्नी को 50 लाख रुपये की राशि देकर परिवार को आर्थिक राहत दी।

दिया 50 लाख का चेक
Gorakhpur: एक सड़क हादसा, एक परिवार उजड़ गया और एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। गोरखपुर के गोला क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक शिक्षक की जिंदगी छीन ली, लेकिन मौत के बाद भी एक व्यवस्था ऐसी सामने आई, जिसने टूट चुके परिवार को संभलने का मौका दिया। यह खबर सिर्फ हादसे की नहीं, बल्कि उस राहत की है, जो सही जानकारी और समय पर मिली मदद से संभव हो सकी।
सड़क हादसे में गई शिक्षक की जान
गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र के हरपुर निवासी शिक्षक सुशील कुमार सिंह की कुछ समय पहले एक मार्ग दुर्घटना में असामयिक मौत हो गई थी। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर के मुखिया के चले जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
SBI की सैलरी पैकेज योजना बनी सहारा
सुशील कुमार सिंह का वेतन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गोला शाखा में आता था। उनका खाता बैंक के सैलरी पैकेज से जुड़ा हुआ था, जिसके तहत जीवन बीमा कवर स्वतः शामिल था। इसी बीमा योजना के अंतर्गत शिक्षक की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी पुष्पा सिंह को 50 लाख रुपये की बीमा राशि स्वीकृत की गई।
पत्नी को सौंपा गया 50 लाख का चेक
शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक गोला शाखा के शाखा प्रबंधक अजय कुमार राय ने दिवंगत शिक्षक की पत्नी पुष्पा सिंह को 50 लाख रुपये का चेक सौंपा। बैंक की ओर से सभी जरूरी औपचारिकताएं तेजी से पूरी की गईं, ताकि परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक मदद मिल सके।
बैंक अधिकारियों की अपील और जागरूकता
इस मौके पर शाखा प्रबंधक ने बताया कि बैंक के सैलरी पैकेज खाताधारकों को कई तरह के बीमा लाभ अपने आप मिलते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी जानकारी कम होती है। जानकारी के अभाव में लोग इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। उन्होंने कहा कि यदि खाताधारक जागरूक हों तो आपात स्थिति में परिवार को बड़ा सहारा मिल सकता है।
परिवार ने जताया आभार
बीमा राशि मिलने के बाद पुष्पा सिंह ने बैंक प्रबंधन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पति की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था, ऐसे कठिन समय में बैंक से मिली यह मदद उनके बच्चों और परिवार के भविष्य के लिए उम्मीद की किरण बनी है। यह मामला ग्रामीण बैंकिंग जागरूकता की अहमियत को साफ तौर पर दिखाता है।