गाजियाबाद 3 बहन सुसाइड मामला: केस में दो हिन्दू पत्नियों के बाद तीसरी मुस्लिम बीवी की एंट्री, औरतों की इन बातों ने घुमा दी जांच

गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड केस ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घर की कलह, रोज़ के झगड़े, बच्चों की अनदेखी और सुसाइड नोट की डरावनी लाइनें इस मामले को सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी बना रही हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 6 February 2026, 1:24 PM IST

Ghaziabad: गाजियाबाद में 3 फरवरी की रात तीन मासूम बहनों की मौत सिर्फ एक सुसाइड केस नहीं, बल्कि एक टूटते परिवार, रोज़ की कलह और अनदेखी ज़िंदगियों की खौफनाक कहानी बनकर सामने आ रही है। जिस घर से चीख-पुकार, गाली-गलौज और अफरा-तफरी की आवाजें उठ रही थी, वहीं से कुछ ही देर बाद तीन बच्चियां नीचे गिरती हैं और मौके पर ही दम तोड़ देती हैं। घटनास्थल पर मां की चीखें, खून से सने कपड़े और घर के भीतर पसरी खामोशी…सब कुछ एक डरावनी तस्वीर बनाता है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चियां इतनी अकेली कैसे हो गई कि मौत ही रास्ता बन गई।

टीलामोड़ की सोसाइटी और बंद दरवाजों के पीछे का सच

गाजियाबाद जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर टीलामोड़ इलाके की भारत सिटी सोसाइटी जहां बी-1 टॉवर के नौवें फ्लोर पर फ्लैट नंबर 907 में चेतन अपने परिवार के साथ रहते थे। इस एक फ्लैट में तीन पत्नियां, पांच बच्चे और रिश्तेदारों का आना-जाना…बाहर से सामान्य दिखने वाला ये घर अंदर से कलह और तनाव से भरा हुआ था। 4 फरवरी की रात करीब दो बजे तीन लड़कियां बिल्डिंग से नीचे गिर गई। इसके बाद से घर के दरवाजे बंद हैं और परिवार पूरी तरह खामोश हो गया है।

चीखें, गालियां और खून से सने कपड़े

सोसाइटी की महिलाओं का कहना है कि जिस वक्त बच्चियां नीचे गिरी, उनकी मां भागते हुए नीचे पहुंची। वह जोर-जोर से रो रही थी, पति को गालियां दे रही थी और अपने कपड़े उतारकर बच्चियों के खून से सने शरीर पर डाल रही थीं। पहले स्वेटर और फिर शॉल…माहौल पूरी तरह बदहवास था। लेकिन लोग कहते हैं कि पिता बेचैन या परेशान नहीं दिख रहा था, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

रोज़ की कलह और बच्चों की अनदेखी

पड़ोसियों और जानने वालों की बातों से साफ है कि घर में रोज़ झगड़े होते थे। आर्थिक तंगी थी, लेकिन उससे बड़ी परेशानी घर का माहौल था। बच्चियां स्कूल नहीं जाती थी, बाहर लोगों से उनका कोई मेलजोल नहीं था और वे कलह के बीच अकेली होती चली गई। लोग सवाल उठाते हैं कि अगर एक बच्ची ऐसा कदम सोचती, तो बाकी रोक सकती थी, लेकिन यहां तीनों ही चल पड़ी।

सुसाइड नोट और डरावनी लाइन

पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें ‘हम’ नहीं बल्कि ‘मैं’ लिखा है। एक लाइन बेहद डरावनी है- “मार खाने से अच्छा है मरना…”। इससे यह शक और गहरा हो जाता है कि बच्चियों के साथ घर में मारपीट भी होती थी। तीनों बहनों की मौत अब सिर्फ एक केस फाइल नहीं, बल्कि सिस्टम, परिवार और समाज की नाकामी की एक चुपचाप चीख बन चुकी है।

Location : 
  • Ghaziabad

Published : 
  • 6 February 2026, 1:24 PM IST