महराजगंज के एक डॉक्टर को NEET PG में एडमिशन दिलाने के नाम पर लखनऊ के एक फर्म से जुड़े दो लोगों ने 55 लाख रुपये ठग लिए। अब एडमिशन न कराने के साथ ही पैसे लौटाने से इनकार और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पढ़ें पूरी खबर

NEET PG एडमिशन के नाम पर 55 लाख की ठगी
महराजगंज: जनपद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां NEET PG एडमिशन के नाम पर एक डॉक्टर से 55 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। पीड़ित ने इस संबंध में प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरी घटना?
पीड़ित प्रभात कुमार श्रीवास्तव, निवासी पिपरा मुण्डेरी, पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने बताया कि NEET PG में प्रवेश के लिए प्रयास के दौरान उनकी मुलाकात विक्की त्रिपाठी और विनोद धीमन से हुई। दोनों ने खुद को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित “सन साईन एशिया” फर्म से जुड़ा बताते हुए नेपाल के काठमांडू स्थित एक मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया।
कुल 55 लाख रुपये की मांग
आरोप है कि दोनों ने एडमिशन कराने के नाम पर कुल 55 लाख रुपये की मांग की। भरोसे में आकर पीड़ित ने यह रकम अलग-अलग तारीखों में किस्तों के रूप में दी, जिसमें नकद और बैंक ट्रांसफर दोनों शामिल हैं। यह पूरी रकम आरोपियों द्वारा बताए गए एक्सिस बैंक खाते में जमा कराई गई।
आरोपियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग
पीड़ित के अनुसार, जब एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करने का समय आया तो आरोपी टालमटोल करने लगे और बाद में साफ तौर पर मना कर दिया कि अब एडमिशन नहीं हो पाएगा। इसके बाद जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी दी।
व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क
यह भी आरोप है कि आरोपी सामान्य फोन कॉल से बात करने के बजाय केवल व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं, जिससे उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाना कठिन हो रहा है। पीड़ित ने यह भी बताया कि आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।
इस पूरे मामले से पीड़ित और उसका परिवार काफी भयभीत है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4), 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए और उनकी 55 लाख रुपये की राशि वापस दिलाई जाए। फिलहाल यह मामला चर्चा में है और अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि पीड़ित को कब तक न्याय मिल पाता है।