
गुड़ गोदाम (Img : Dynamite News)
महराजगंज : सिसवा बाजार नगर पालिका परिषद क्षेत्र में गुड़ गोदाम की विवादित भूमि पर विवाह भवन और दुकानों के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह के पक्ष को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सिविल जज प्रवर खंड/एफटीसी, महराजगंज की अदालत ने वादीगण की ओर से दाखिल अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थनापत्र 6ग2 को निरस्त कर दिया। अदालत ने अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद स्पष्ट किया कि वादीगण के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं हो रहा है।
मामला वाद संख्या 174/2022 शिवेंद्र सिंह आदि बनाम नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार से जुड़ा है। वादी शिवेंद्र सिंह पुत्र रामप्रसाद सिंह, मानवेंद्र सिंह पुत्र यादवेंद्र सिंह तथा अन्य की ओर से नगर पालिका परिषद के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दाखिल किया गया था। वादी पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि विवादित गुड़ गोदाम की संपत्ति पर उनका स्वामित्व और कब्जा है। आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी पक्ष उनकी संपत्ति में हस्तक्षेप करते हुए निर्माण और तोड़फोड़ करना चाहता है। इसी आधार पर नगर पालिका और अन्य प्रतिवादियों को निर्माण कार्य में हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।
वादीगण ने अपने दावे के समर्थन में संपत्ति का पुराना इतिहास अदालत के सामने रखा। उनका कहना था कि विवादित भूमि उनके पूर्वज विशुन दयाल सिंह आदि की थी और बाद में नवल किशोर सिंह आदि के माध्यम से उनके परिवार के हिस्से में आई। वादी पक्ष के अनुसार 3 मार्च 1921 को कानपुर शुगर वर्क्स को गुड़ गोदाम के लिए भूमि दी गई थी। बाद में कंपनी द्वारा गोदाम, भवन और कर्मचारियों के रहने के लिए निर्माण कराया गया। वादी पक्ष ने यह भी दावा किया कि 4 नवंबर 1947 को कंपनी ने भवन आदि के संबंध में उनके पूर्वजों के पक्ष में हस्तांतरण किया था। इसके बाद अलग-अलग समय में खंड विकास कार्यालय, चीनी निगम के कर्मचारियों, पशु चिकित्सा अधिकारी, विद्यालय और अन्य किरायेदारों के उपयोग में संपत्ति दिए जाने का भी दावा किया गया।
दूसरी ओर नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार और अन्य प्रतिवादियों ने वादीगण के दावों का कड़ा विरोध किया। प्रतिवादियों का कहना था कि विवादित भूमि राजस्व अभिलेखों में वादीगण के नाम दर्ज नहीं है। भूमि गुड़ गोदाम कानपुर के नाम से दर्ज होने और सरकारी/नगर पालिका अभिलेखों में उसके संबंध में अलग स्थिति होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई। प्रतिवादियों ने यह भी तर्क दिया कि वादी पक्ष के दावे से संबंधित पूर्व मुकदमों और राजस्व कार्यवाहियों का भी रिकॉर्ड मौजूद है। वर्ष 2011 में राजस्व न्यायालय में दाखिल कार्यवाही का उल्लेख करते हुए बताया गया कि विवादित भूमि के संबंध में किया गया दावा पहले ही निरस्त हो चुका है और उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई। प्रतिवादियों ने यह भी कहा कि नगर पालिका द्वारा किया जा रहा निर्माण सार्वजनिक हित से जुड़ा है और वहां दुकानों तथा विवाह भवन जैसी सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों का अवलोकन किया। आदेश में कहा गया कि विवादित भूमि आराजी संख्या 576, रकबा 0.5100 हेक्टेयर से संबंधित है। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों में भूमि गुड़ गोदाम कानपुर के नाम से दर्ज पाई गई और वादीगण का नाम संबंधित अभिलेखों में दर्ज नहीं मिला। अदालत ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रविष्टियों और उनके कानूनी प्रभाव पर भी विचार किया। न्यायालय के अनुसार केवल मौखिक दावे या कब्जे का कथन अंतरिम निषेधाज्ञा देने के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि वादी को अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया अधिकार स्थापित करना आवश्यक है।
वादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, जिसमें कानपुर शुगर वर्क्स लिमिटेड और नवल किशोर सिंह आदि के बीच संपत्ति से संबंधित करार का उल्लेख था, पर भी अदालत ने गौर किया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया कि दस्तावेज अनुबंध पत्र के स्वरूप का प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि उक्त दस्तावेज के जरिए संपत्ति पर निर्मित भवन और रेलवे साइडिंग का विक्रय किया गया था तो संबंधित कानूनों के तहत उसके पंजीकरण की आवश्यकता थी। दस्तावेज के अपंजीकृत होने के कारण उसे अंतरिम राहत का मजबूत आधार नहीं माना गया।
वादी पक्ष द्वारा वर्ष 2012 की कथित लीज डीड सहित अन्य दस्तावेज भी अदालत के सामने रखे गए। न्यायालय ने पाया कि संबंधित लीज डीड पर आवश्यक हस्ताक्षरों का अभाव है। इस कारण उक्त दस्तावेज से वादीगण को अंतरिम निषेधाज्ञा देने का आधार नहीं मिल सका। वादी पक्ष ने संपत्ति के कुछ हिस्सों को अलग-अलग लोगों और संस्थाओं को किराये पर दिए जाने का भी उल्लेख किया था। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इन दावों को भी अंतरिम राहत के लिए पर्याप्त नहीं माना।
नगर पालिका परिषद की ओर से विवादित परिसर में निर्माण कार्य से जुड़े कई दस्तावेज न्यायालय में पेश किए गए। इनमें दुकानों के निर्माण और आवंटन से संबंधित अभिलेख, कार्यादेश, ई-निविदा, निविदा बोर्ड प्रस्ताव, परियोजना संबंधी दस्तावेज और मौके की तस्वीरें शामिल थीं।
अदालत के आदेश के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों से यह सामने आया कि विवादित संपत्ति के कुछ हिस्सों में सरकारी परियोजनाओं के तहत निर्माण कार्य किया जा रहा है। नगर पालिका संपत्ति रजिस्टर में भी गुड़ गोदाम कानपुर की प्रविष्टि का उल्लेख पाया गया।
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सभी दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने वादीगण का अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थनापत्र 6ग2 निरस्त कर दिया। अदालत ने पत्रावली को तनकीह के लिए 13 अक्टूबर 2026 को पेश करने का आदेश दिया है।
अदालत के इस आदेश के बाद सिसवा बाजार में गुड़ गोदाम की भूमि पर दुकानों और विवाह भवन के निर्माण को रोकने की मांग को फिलहाल झटका लगा है। नगर पालिका परिषद द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के खिलाफ मांगी गई अंतरिम रोक अदालत ने नहीं दी है। हालांकि, यह आदेश केवल अस्थायी निषेधाज्ञा के आवेदन पर है। विवादित संपत्ति के अंतिम स्वामित्व और मूल वाद के अधिकारों का अंतिम फैसला आगे होने वाले विचारण और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
Location : Maharajganj
Published : 26 August 2026, 1:45 PM IST
Topics : Civil Court Maharajganj Maharajganj News (महाराजगंज न्यूज़) Shivendra Singh Siswan Bazar News up latest news