फिरोजाबाद में पूर्व डीएम पर तहसीलदार के भ्रष्टाचार व वसूली के गंभीर आरोप, कोर्ट पहुंचा मामला

फिरोजाबाद में पूर्व डीएम रमेश रंजन और तहसीलदार राखी शर्मा के बीच विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। तहसीलदार ने भ्रष्टाचार, ब्लैकमेल और वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत ने रिपोर्ट तलब की है, अगली सुनवाई 12 जून को होगी। मामला चर्चा में बना हुआ है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 9 June 2026, 11:36 AM IST

Firozabad: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में प्रशासनिक स्तर पर चल रहा विवाद अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। तत्कालीन जिलाधिकारी Ramesh Ranjan और तत्कालीन तहसीलदार टूंडला Rakhi Sharma के बीच शुरू हुआ प्रशासनिक मतभेद अब भ्रष्टाचार, प्रताड़ना और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोपों में बदल गया है। दोनों अधिकारियों का तबादला हो चुका है, लेकिन विवाद खत्म होने के बजाय और गहराता जा रहा है।

कोर्ट में पहुंचा मामला

तहसीलदार राखी शर्मा ने आगरा स्थित न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल करते हुए पूर्व जिलाधिकारी Ramesh Ranjan और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मृदुल दुबे की अदालत में हुई, जहां अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए डीआईजी और मंडलायुक्त से रिपोर्ट तलब की है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है।

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किन-किन पर लगे आरोप

तहसीलदार द्वारा लगाए गए आरोपों में केवल पूर्व जिलाधिकारी ही नहीं, बल्कि उनके कार्यालय से जुड़े अन्य कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें ओएसडी Shailendra Sharma, वरिष्ठ लिपिक Rajendra Khanna, अजीत उपाध्याय और दोजी राम शामिल हैं। सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

आरोपों का विस्तृत विवरण

प्रार्थनापत्र में तहसीलदार Rakhi Sharma ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के नेतृत्व में एक कथित टीम बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य विधि-विरुद्ध तरीके से धन अर्जित करना था। आरोप है कि यह टीम विभिन्न विभागों- तहसील, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और विकास विभाग के अधिकारियों को बिना कारण नोटिस भेजती थी और कई मामलों में वेतन रोकने के आदेश जारी कर दबाव बनाया जाता था।

आरोपों के अनुसार, इन कार्रवाइयों के जरिए संबंधित अधिकारियों को ब्लैकमेल कर अवैध वसूली की जाती थी। तहसीलदार का कहना है कि जब उन्होंने कथित दबाव और मांगों को स्वीकार करने से इनकार किया, तो उनके खिलाफ आईजीआरएस प्रार्थनापत्रों के निस्तारण में लापरवाही का आरोप लगाकर उनका वेतन रोक दिया गया।

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गंभीर आरोप: आईफोन और महीनेदारी की मांग

प्रार्थनापत्र में यह भी दावा किया गया है कि जुलाई माह में उनसे कथित रूप से ‘महीनेदारी’ देने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, वेतन जारी करने के बदले जिलाधिकारी को आईफोन देने की मांग की गई। आरोप है कि लगातार दबाव के कारण उन्हें आईफोन देने के लिए मजबूर होना पड़ा और इसके बाद ही उनके मामलों में राहत मिली।

प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है क्योंकि इसमें उच्च स्तर के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। हालांकि सभी आरोप अभी न्यायिक जांच और रिपोर्ट पर आधारित हैं और किसी भी पक्ष की दोषसिद्धि न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

आगे की सुनवाई

मामले में अदालत ने डीआईजी और मंडलायुक्त से रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। अगली सुनवाई 12 जून को होगी, जिसमें रिपोर्ट के आधार पर केस की दिशा तय होने की संभावना है।

Location :  Firozabad

Published :  9 June 2026, 11:36 AM IST