बदायूं हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) प्लांट में अधिकारियों की हत्या के आरोपित अजय और उसके परिवार का दबदबा सिर्फ प्लांट की चारदीवारी तक सीमित नहीं था, बल्कि मूसाझाग थाने तक उसकी ‘पहुंच’ बताई जा रही है।

बदायूं हिंदुस्तान पेट्रोलियम का मामला (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Budaun: बदायूं हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) प्लांट में अधिकारियों की हत्या के आरोपित अजय और उसके परिवार का दबदबा सिर्फ प्लांट की चारदीवारी तक सीमित नहीं था, बल्कि मूसाझाग थाने तक उसकी ‘पहुंच’ बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विधायक से करीबी और सजातीय समीकरणों के कारण पुलिस अक्सर कार्रवाई से बचती रही; मामला जब भी ऊपर पहुँचा, राजनीतिक पैरवी के चलते आरोपित हर बार बच निकलते थे। अब प्लांट के एक कर्मचारी की तहरीर पर दर्ज नए मुकदमे ने इस कथित नेटवर्क की एक और परत खोल दी है।
कोतवाली दातागंज क्षेत्र के मोहल्ला अरेला निवासी राहुल मिश्रा ने मूसाझाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। राहुल HPCL प्लांट में यूटिलिटी ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। तहरीर के मुताबिक, आरोपित अजय, उसके भाई नन्हें व केशव के अलावा परिवार के ही शिवम और अभय भी प्लांट में अलग-अलग पदों पर तैनात थे। आरोप है कि सभी ने एक राय होकर प्लांट के भीतर ऐसा माहौल बना दिया था कि न अधिकारियों की चलती थी, न ही दूसरे कर्मचारियों की।
तहरीर में कहा गया है कि आरोपित पक्ष लगातार कर्मचारियों को डराने-धमकाने में लगा रहता था। प्लांट में इस कदर खौफ़ बना दिया गया था कि स्टाफ खुलकर विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पाता। राहुल का आरोप है कि इसी दबंगई की परिणति 4 दिसंबर की रात सामने आई, जब नन्हें ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें घायल कर दिया।
राहुल के अनुसार, घटना की रात ही पुलिस को सूचना दी गई, पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने खुद जिला अस्पताल जाकर मेडिकल कराया। आरोप है कि अगले दिन जब वह प्लांट जा रहे थे, तो रास्ते में घेरकर उन्हें दोबारा धमकाया गया। लगातार दबाव और डर के कारण वह तब चुप रह गए। अब, जब अजय और उसके परिवार पर ‘सिस्टम की पकड़’ मजबूत हुई है, राहुल ने दोबारा हिम्मत जुटाकर तहरीर दी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया।
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उल्लेखनीय है कि दर्ज तहरीर में यह भी अंकित कराया गया है कि “उस समय थाने में शिकायत नहीं दी गई थी।” स्थानीय स्तर पर इसे पुलिस द्वारा अपनी शुरुआती निष्क्रियता पर सीधे सवाल न उठें, इसके लिए पहले से ‘सेफगार्ड’ रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
परिवार की पुलिस और राजनीतिक हलकों में पैठ के भी संकेत सामने आए हैं। आरोपित अभय की कुछ तस्वीरें चर्चा में हैं, जिनमें वह तत्कालीन सीओ दातागंज के.के. तिवारी और विधायक के ब्लॉक प्रमुख बेटे के साथ एक कंबल वितरण कार्यक्रम के मंच पर दिखाई दे रहा है। इन तस्वीरों के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि परिवार की स्थानीय सत्ता और सिस्टम तक पहुँच कितनी गहरी थी।
अफसरों की हत्या के बाद प्लांट से जुड़े पुराने विवाद और दबी शिकायतें सतह पर आने लगी हैं। नया मुकदमा संकेत दे रहा है कि यदि जांच निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ी, तो दबंगई, संरक्षण और मिलीभगत से जुड़े कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।
इसी कड़ी में आरोपित अजय के ताऊ राकेश की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे अपनी बताकर बेचने के आरोप में तहसीलदार कोर्ट में उनके खिलाफ नया वाद दायर हुआ है। जांच में सामने आया कि जिन 13 लोगों जोरपाल, श्रीराम, बिट्टू, शोभाराम, रामौतार, गिरीश चंद्र, कृष्णा गुप्ता, राजेश कुमार, ओमकार, सुनील कुमार, सुबोध, मुश्ताक और राजपाल को जमीन बेची गई थी, उसका स्वामित्व विवादित है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि दर्ज तहरीर के आधार पर विवेचना शुरू कर दी गई है और सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी। वहीं, प्लांट के कर्मचारियों में इस बात को लेकर उम्मीद भी है और आशंका भी कि क्या इस बार वाकई ‘होल्ड’ टूटेगा या फिर पुराने पैटर्न की तरह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।