फरेंदा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत आनंदनगर स्थित वार्ड नंबर 5 पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (फुलवरिया) में हुई युवक की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस की ढीली कार्यशैली अब खुलकर सामने आ रही है। वारदात को तीन दिन बीत चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर

शराब के बहाने बुलाकर हत्या मामला
Maharajganj: फरेंदा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत आनंदनगर स्थित वार्ड नंबर 5 पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (फुलवरिया) में हुई युवक की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस की ढीली कार्यशैली अब खुलकर सामने आ रही है। वारदात को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन नामजद आरोपियों को अब तक जेल नहीं भेजा जा सका है। इससे मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
जानकारी के मुताबिक, मृतक अरविंद चौधरी (28) को गांव के ही कुछ युवकों ने शराब पिलाने के बहाने बुलाया था। आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते पांच युवकों ने मिलकर उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे फेंक दिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना के बाद मृतक के पिता इंद्रसेन की तहरीर पर पुलिस ने शेषमणि, राजबब्बर, उमानाथ, दुर्गेश और रामकेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लिया, लेकिन तीन दिन बाद भी उन्हें जेल नहीं भेजा गया है। इस देरी को लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने घटना की क्रूरता की पुष्टि कर दी है। मृतक के शरीर पर 13 गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि उसे बुरी तरह पीटा गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर मामले में ढिलाई बरत रही है और आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
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परिवार का कहना है कि अगर जल्द ही आरोपियों को जेल भेजकर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है और वे न्याय की मांग कर रहे हैं।
इस मामले में पुलिस क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध कुमार का कहना है कि जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही सभी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला न सिर्फ एक जघन्य हत्या का है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।