उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। सियासी गलियारों में इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इस बार यूपी में पंचायत चुनाव होंगे या फिर नहीं। आज की इस खास रिपोर्ट में हम यहीं जानेंगे।

कब होने हैं यूपी में पंचायत चुनाव?
Lucknow: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। सियासी गलियारों में अब यह सवाल लगातार गूंज रहा है आखिर चुनाव तय समय पर होंगे या फिर नहीं। क्या इस बार पंचायत चुनाव यूपी में होगा या नहीं?
मंत्री ओपी राजभर ने दूर किया भ्रम
हाल ही में 4 फरवरी (2026) को पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने चुनाव टलने की अटकलों को खारिज करते हुए बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार समयबद्ध तरीके से तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक मतपत्रों की छपाई पूरी हो चुकी है और उन्हें जिलों तक भेजा जा रहा है। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी तक होने की बात भी उन्होंने कही। राजभर ने साफ कहा कि चुनाव टलने की चर्चा केवल “भ्रम” है।
भ्रम की वजह क्या है?
पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के अनुसार कर्मचारी इस समय एसआईआर, संभावित जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं जैसे कार्यों में व्यस्त हैं, जिससे लोगों को चुनाव टलने की आशंका लग रही है। वहीं ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पिछड़ा आयोग गठन की प्रक्रिया जारी है, जो चुनावी टाइमलाइन को प्रभावित करने वाला अहम कारक माना जा रहा है।
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गांव की सरकार पर टिकी निगाहें
यदि किसी कारण चुनाव समय पर नहीं होते हैं तो ग्राम पंचायतों का संचालन प्रशासकों के जरिए करना पड़ सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि गांवों में आम लोगों से लेकर संभावित प्रत्याशियों तक सभी की नजर चुनावी तारीखों की घोषणा पर टिकी हुई है।
आरक्षण प्रक्रिया बनी पहली बड़ी चुनौती
हर पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में आरक्षण तय किया जाता है। प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम सूची प्रकाशित होने में आमतौर पर तीन से पांच महीने का समय लगता है। यदि आयोग का गठन मार्च में होता है तो पूरी प्रक्रिया जुलाई 2026 तक खिंच सकती है। ऐसे में चुनाव सितंबर या अक्टूबर तक जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विधानसभा चुनाव की टाइमिंग से बढ़ी राजनीतिक चिंता
जनवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव होना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बन सकता है। पंचायत चुनाव को सत्ता का ‘सेमीफाइनल’ माना जाता है और इसमें सामने आने वाली अंदरूनी खींचतान विधानसभा चुनाव की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि सियासी दल चुनाव की टाइमिंग को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं।
क्या 2027 के बाद होंगे पंचायत चुनाव?
कुछ जानकार मानते हैं कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। सूत्रों की मानें तो गांव और शहर के स्थानीय चुनाव अलग-अलग चरणों में एक साथ कराना ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में एक प्रयोग भी हो सकता है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
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फिलहाल इंतजार ही सबसे बड़ा सच
पंचायत चुनाव समय पर होंगे, विधानसभा से पहले होंगे या बाद में इस पर अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग और सरकार की संयुक्त बैठक के बाद ही सामने आएगा। तब तक गांव की चौपालों से लेकर राजधानी के सत्ता गलियारों तक बस एक ही सवाल तैर रहा है क्या इस बार पंचायत चुनाव यूपी में होगा या नहीं?