
चुनाव लड़ने का ऐलान कर चर्चा में आईं दिव्या मित्तल (सोर्स- एक्स)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का नाम सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। साल 2013 बैच की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने 13 साल के लंबे और शानदार प्रशासनिक सफर को अलविदा कहते हुए 30 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे सितंबर महीने में स्वीकार कर लिया गया। उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद से ही सियासी गलियारों और आम जनता के बीच तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने खुद वीडियो संदेश जारी कर अपनी राजनीतिक पारी का ऐलान कर दिया है, जिसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति साफ नजर आ रही है।
दिव्य मित्तल की शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने विदेश (लंदन) में एक हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट नौकरी की, लेकिन देश सेवा के जज्बे के चलते उन्होंने विदेश का वह सुखद भविष्य छोड़ दिया और स्वदेश लौटकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। साल 2013 में वे सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS बनीं और उत्तर प्रदेश कैडर मिला।
अपने 13 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने मिर्जापुर, संत कबीरनगर और देवरिया जैसे जिलों में बतौर जिला कलेक्टर व अन्य अहम पदों पर बेहतरीन कार्य किया। अपनी कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रतिष्ठित 'अशोक बंबावाले मेमोरियल अवार्ड' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुति देने का अवसर भी मिल चुका है। प्रशासनिक सेवा के अंतिम दौर में वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
जब दिव्या मित्तल ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दिया था, तब चारों तरफ यही सवाल था कि आखिर एक सफल करियर के बीच उन्होंने यह कदम क्यों उठाया। लोग अलग-अलग कयास लगा रहे थे, लेकिन किसी को उनके अगले कदम की भनक नहीं थी। अब उनके वीडियो संदेश से साफ हो गया है कि उनका यह फैसला कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और लंबी राजनीतिक रणनीति थी। अकेले और बिना किसी पूर्वाग्रह के चुनाव लड़ने का उनका यह ऐलान इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने बहुत पहले से ही जनसेवा के लिए यह बड़ा प्लान तैयार कर लिया था।
अपने वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि वह राजनीति में जरूर आ रही हैं, लेकिन उनका मकसद पारंपरिक राजनीति करना या किसी राजनीतिक दल का मोहरा बनना नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ेंगी, बल्कि वह सीधे तौर पर जनता के साथ मिलकर और जनता के समर्थन से चुनावी मैदान में उतरेंगी।
अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकेंगी, किसी नए राजनीतिक दल का गठन करेंगी या फिर किसी अन्य मोर्चे के साथ गठबंधन का रास्ता चुनेंगी।
दिव्या मित्तल लगातार आम जनता के बीच सीधे पहुंच रही हैं और जनहित से जुड़े ऐसे बुनियादी मुद्दों को उठा रही हैं जो अक्सर सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही में दबकर रह जाते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य उन आम लोगों की आवाज बनना है, जिनकी समस्याएं प्रशासनिक तंत्र तक पहुंचने के बावजूद अनसुनी कर दी जाती हैं। डायरेक्ट पब्लिक कनेक्ट और जमीनी मुद्दों को अपनी ताकत बनाकर वह जनता के बीच अपनी एक मजबूत पकड़ बनाने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं।
Location : Lucknow
Published : 29 September 2026, 10:29 AM IST
Topics : Civil Servant to Politician Divya Mittal Independent Election UP Politics Uttar Pradesh News