पानी के तेज बहाव में बह गए अरमान! बाढ़ के भयानक रूप ने छीना लोगों का आशियाना; देवरिया में तबाही का खौफनाक मंजर

राप्ती-घाघरा का पानी लगातार बढ़ रहा है, क्या इस बार नदी की लहरें गांवों के घरों और किसानों की मेहनत तक पहुंचेंगी? ग्रामीण प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठा रहे हैं।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 8 September 2026, 10:30 AM IST

Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में राप्ती और घाघरा समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्रामीणों को अब बाढ़, भूमि कटान, फसल बर्बादी और मवेशियों के चारे की समस्या का डर सताने लगा है। कई तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपना पुश्तैनी आशियाना और खेती-बाड़ी नदी के निशाने पर आने की आशंका है।

नदियों के किनारे बसे गांवों में हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण दिन-रात नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। पानी बढ़ने के साथ ही कटान का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है और बड़े पैमाने पर भूमि नदी की धारा में समा सकती है।

नदी का पानी बढ़ा तो बढ़ी ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ फसल तक सीमित नहीं है। बाढ़ की स्थिति पैदा होने पर मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा होने के साथ-साथ परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने की मजबूरी भी पैदा हो सकती है। जिन लोगों के मकान और पुश्तैनी जमीन नदी के तट के आसपास हैं, उन्हें अपने घर-बार की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा भय सता रहा है।

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तैयारी कागजों पर या जमीन पर?

तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बरसात और नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब पानी सिर के ऊपर पहुंचने लगता है तो जमीनी तैयारियां नाकाफी नजर आती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को जलस्तर बढ़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ानी चाहिए। कटान प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल बचाव के इंतजाम, नाव, सुरक्षित स्थान, पशुओं के लिए चारा और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘पानी बढ़ रहा है, लेकिन इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे’

ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो सबसे पहले निचले इलाकों में रहने वाले परिवार प्रभावित होंगे। ऐसे में प्रशासन को संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर उन्हें समय रहते अलर्ट करना चाहिए।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाए, कटान वाले स्थानों को चिन्हित कर तत्काल बचाव कार्य शुरू कराया जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।

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प्रशासन की सुस्ती बनी चिंता का कारण

ग्रामीणों का आरोप है कि खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक ऐसा कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा, जिससे तटीय इलाकों के लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि प्रशासन अगर समय रहते सक्रिय नहीं हुआ तो स्थिति बिगड़ने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू करने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

समय रहते कदम नहीं उठे तो बढ़ सकती है मुश्किल

तटीय क्षेत्र के लोगों ने दो टूक कहा कि नदी का पानी हर दिन बढ़ रहा है और प्रशासन को अब सिर्फ आंकड़ों और बैठकों से आगे निकलकर जमीन पर उतरना होगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि संभावित बाढ़ और कटान से निपटने के लिए तत्काल प्रभाव से प्रभावी कार्ययोजना लागू की जाए।

नदी के मिजाज पर टिकी ग्रामीणों की नजर

फिलहाल राप्ती-घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने तटीय गांवों में रहने वाले लोगों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं और नदी के मिजाज पर नजर रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन अभी नहीं जागा तो नदी का बढ़ता पानी सिर्फ खेत ही नहीं, बल्कि घरों और वर्षों की मेहनत को भी अपने साथ बहा सकता है।

Location :  Deoria

Published :  8 September 2026, 10:30 AM IST