1971 के युद्ध के हीरो और देवरिया में पहली बार कमल खिलाने वाले नेता, जानिए देश ने कैसे एक महान शख्सियत को खो दिया

देवरिया के पूर्व सांसद और भारतीय सेना के पूर्व उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का दिल्ली के मेदांता अस्पताल में निधर हो गया उन्होंने 1971 के भातर-पाक युध्द में हिस्सा लिया था। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए और दो बार देवरिया से सांसद चुने गए। उनके पुत्र शशांक मणि त्रिपाठी भी वर्तमान में देवरिया से सांसद हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 8 November 2026, 2:25 PM IST

Deoria: देवरिया के पूर्व सांसद एवं भारतीय सेना के पूर्व उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का रविवार को दिल्ली के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने सुबह 11:15 बजे अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से उनका अस्पताल में उपचार चल रहा था। उनके निधन की सूचना से देवरिया सहित पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। सैन्य सेवा से लेकर राजनीति तक उनका सफर अनुशासन, नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान की मिसाल रहा।

1971 के भारत-पाक युध्द में निभाई थी भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने भारतीय सेना में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जून 1955 में सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने विभिन्न सैन्य पदों पर रहते हुए देश की सेवा की। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी उन्होंने हिस्सा लिया। वह 1985 से 1988 तक आर्मर्ड डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 1988 से 1990 तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में डायरेक्टर जनरल (कॉम्बैट व्हीकल्स) और 1990 से 1992 तक 2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग रहे। वर्ष 1992 से 1993 तक उन्होंने भारतीय सेना के उप थल सेनाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम) और अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया था।

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1999 में देवरिया से भाजपा का पहली बार खुलवाया था खाता

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर देवरिया लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित होकर उन्होंने देवरिया संसदीय सीट पर भाजपा का पहली बार खाता खोला। इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 1999 में 13वीं लोकसभा के चुनाव में उन्होंने फिर जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह को पराजित किया था। इस तरह वह दो बार देवरिया के सांसद रहे।

दो अलग-अलग राजनीतिक दौर में किया देवरिया का प्रतिनिधित्व

उनका पहला संसदीय कार्यकाल 1996 से 1998 के बीच रहा। इस दौरान केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार के बाद संयुक्त मोर्चा की एचडी देवगौड़ा और आईके गुजराल के नेतृत्व वाली सरकारें बनीं। वहीं, वर्ष 1999 से 2004 तक उनका दूसरा कार्यकाल अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान रहा। इस अवधि में उन्होंने संसद में देवरिया का प्रतिनिधित्व किया।

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बेटे शशांक त्रिपाठी भी हैं देवरिया से सांसद

श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का परिवार भी देवरिया की राजनीति में अपनी पहचान रखता है। उनके पुत्र शशांक मणि त्रिपाठी वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर देवरिया से सांसद निर्वाचित हुए। इस प्रकार पिता के बाद पुत्र ने भी इसी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

वर्ष 1996 में देवरिया से भाजपा की पहली लोकसभा जीत के साथ उन्होंने जिले के राजनीतिक इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई थी। सैन्य अधिकारी के रूप में देश की सेवा करने के बाद सांसद के रूप में देवरिया की आवाज संसद तक पहुंचाने वाले श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के निधन से जिले ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व को खो दिया है।

Location :  Deoria

Published :  8 November 2026, 2:25 PM IST