गोरखपुर में 2012 के नाबालिग अपहरण और दुष्कर्म मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 8 साल की सजा सुनाई है। “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत पुलिस और अभियोजन की मजबूत पैरवी से यह फैसला संभव हुआ।

प्रतिकात्मक फोटो (IMG: Google)
Gorakhpur: गोरखपुर में एक नाबालिग के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में आखिरकार इंसाफ की आवाज गूंजी है। साल 2012 में हुए अपहरण और दुष्कर्म के इस मामले में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। यह फैसला सिर्फ एक अपराधी को सजा देने भर का नहीं है, बल्कि यह उन सभी मामलों के लिए एक मिसाल है जहां न्याय में देरी जरूर होती है, लेकिन अंधेरा हमेशा कायम नहीं रहता।
यह मामला थाना खोराबार क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2012 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले को मु0अ0सं0 352/2012 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376 के अंतर्गत दर्ज किया था। अभियोजन के मुताबिक आरोपी संदीप निषाद, जो लालपुर टिकर टोला बड़का भट्ठा का रहने वाला है, ने नाबालिग लड़की का अपहरण किया और उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश भी देखने को मिला था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और जरूरी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए, जो इस केस में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
मा० न्यायालय एफटीसी-1, गोरखपुर ने आरोपी संदीप निषाद को दोषी करार देते हुए 8 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 18,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
इस केस में उत्तर प्रदेश पुलिस के “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान की भूमिका काफी अहम रही। इस अभियान का उद्देश्य पुराने और गंभीर मामलों में तेजी से सुनवाई कराकर दोषियों को सजा दिलाना है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल और थाना स्तर के पैरोकारों ने इस केस की लगातार निगरानी की।