
बाराबंकी स्टेशन पर भीषण हादसा (Img: Google)
Barabanki: बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात हुआ दर्दनाक हादसा कई लोगों की आंखें नम कर गया। एक परिवार जो अपने घर लौटने की खुशी में सफर पर निकला था, कुछ ही पलों में ऐसी त्रासदी का शिकार हो गया कि पीछे सिर्फ चीखें, आंसू और तीन मासूम बच्चों की बेबसी रह गई। चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान पति-पत्नी का संतुलन बिगड़ गया, जिससे पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
जानकारी के अनुसार आजमगढ़ जिले के लाटघाट क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव निवासी 35 वर्षीय मनोज कुमार अपनी पत्नी वंदना और तीन बच्चों के साथ लखनऊ से अपने गांव लौट रहे थे। दंपति गोमतीनगर में रहकर काम करते थे और परिवार के साथ उत्सर्ग एक्सप्रेस से आजमगढ़ जाने वाले थे। गुरुवार रात करीब नौ बजे बाराबंकी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर ट्रेन पहुंची। ट्रेन में काफी भीड़ थी। ऐसे में वंदना पहले अपनी पांच वर्षीय बेटी हिमांशी, चार वर्षीय बेटी मीठी और ढाई माह की बच्ची के साथ ट्रेन में चढ़ गईं। मनोज सामान लेकर पीछे से चढ़ने का प्रयास कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मनोज की पीठ पर भारी बैग था। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी और उनका संतुलन बिगड़ गया। उन्होंने ट्रेन का हैंडल पकड़कर खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन काफी दूर तक घिसटते चले गए। पति को खतरे में देखकर वंदना ने भी साहस दिखाया। उन्होंने अपनी गोद में मौजूद ढाई माह की बच्ची को ट्रेन के अंदर मौजूद एक यात्री को सौंप दिया और मनोज को ऊपर खींचने का प्रयास किया। लेकिन इस कोशिश में उनका भी संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन से नीचे गिर गईं।
दोनों कुछ दूरी तक ट्रेन के साथ घिसटते रहे। स्टेशन पर मौजूद लोगों की चीख-पुकार सुनकर लोको पायलट ने ट्रेन रोक दी।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेल कर्मचारी मौके पर पहुंचे। घायल दंपति को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने मनोज कुमार को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल वंदना की हालत चिंताजनक होने के कारण उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) रेफर कर दिया गया। डॉक्टर उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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इस हादसे का सबसे मार्मिक दृश्य आरपीएफ पोस्ट के बाहर देखने को मिला। पांच साल की हिमांशी अपनी ढाई माह की छोटी बहन को गोद में लिए बार-बार एक ही सवाल पूछ रही थी-"पापा आ जाएंगे न?" उसे यह नहीं पता था कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। दूसरी ओर चार साल की मीठी रोते-रोते थक गई और आरपीएफ पोस्ट के फर्श पर ही सो गई। ढाई माह की बच्ची लगातार रो रही थी और बुखार से तप रही थी। बच्चों की हालत देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। महिला पुलिसकर्मियों ने बच्चों को संभाला और उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की।
Location : Barabanki
Published : 12 June 2026, 2:11 PM IST