
बलरामपुर स्वास्थ्य घोटाले का खुलता राज
Balrampur: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सामने आए करोड़ों रुपये के बहुचर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस टीम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जैसे-जैसे जांच के पन्ने पलट रहे हैं, वैसे-वैसे जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पूर्व में तैनात रहे अधीक्षकों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं।
विजिलेंस के हाथ ऐसे अहम सुराग और पुख्ता दस्तावेज लगे हैं, जो सीधे तौर पर तत्कालीन सीएचसी प्रभारियों की भूमिका को वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन की हेराफेरी के कठघरे में खड़ा करते हैं।
2014 से 2022 के बीच हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला वर्ष 2014 से 2022 के दौरान स्वास्थ्य महकमे में हुई व्यापक वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा है। इस आठ साल की लंबी अवधि के दौरान जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं, सर्जिकल उपकरणों और अन्य प्राथमिक चिकित्सा सामग्रियों की आड़ में बड़ा खेल रचा गया। विजिलेंस की टीम ने इस समय सीमा में हुए तमाम भुगतानों, निविदा प्रक्रियाओं और आपूर्ति से जुड़ी फाइलों को गहराई से खंगाला है।
कागजों पर आपूर्ति और हस्ताक्षरों का मिलान
जांच एजेंसी का मुख्य फोकस उन दस्तावेजों पर है, जिन पर तत्कालीन अधीक्षकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। विजिलेंस की टीम अब बिलों के सत्यापन, स्टॉक रजिस्टर में दर्ज एंट्री और भुगतान की अंतिम संस्तुति करने वाले अधिकारियों के हस्ताक्षरों का फोरेंसिक व तकनीकी मिलान करवा रही है।
पड़ताल का मूल उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन मदों में सरकारी खजाने से भारी-भरकम बजट जारी किया गया, क्या उन सामानों की वास्तविक डिलीवरी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंची थी या फिर महज कागजी खानापूर्ति करके बजटीय राशि को ठिकाने लगा दिया गया।
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पूर्व विधायक और विभागीय कर्मियों के नेटवर्क की पड़ताल
यह घोटाला किसी एक अस्पताल या कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। मामले में पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और उनके भाई (जो तत्कालीन समय में स्वास्थ्य विभाग में लिपिक पद पर कार्यरत थे) अजय श्रीवास्तव का नाम पहले ही सुर्खियों में रहा है।
विजिलेंस की टीम इस पूरे नेक्सस से जुड़ी निजी फर्मों, संदेहास्पद बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। कई केंद्रों से कुछ अहम फाइलों और अभिलेखों के गायब होने की बात भी सामने आई है, जिससे विभागीय अधिकारियों की नीयत पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
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पुष्टि होते ही होगी कठोर कानूनी कार्रवाई
विजिलेंस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का पूरा परीक्षण किया जा रहा है। जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले पत्रों में फर्जीवाड़ा प्रमाणित होगा, उनकी सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। विभागीय सूत्रों का मानना है कि यदि तत्कालीन सीएचसी अधीक्षकों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य अंतिम जांच में सही पाए जाते हैं, तो आने वाले दिनों में कई बड़े अधिकारियों पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज होने की गाज गिरना तय माना जा रहा है।
Location : Balrampur
Published : 31 August 2026, 3:03 AM IST
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