बलरामपुर में ड्रोन, कॉम्बिंग और अलर्ट मोड में प्रशासन; हर कदम पर बढ़ाई गई निगरानी

बलरामपुर की तराई में तेंदुए की हलचल ने लोगों की नींद उड़ा दी है। पगमार्क मिलने के बाद प्रशासन ने अचानक सख्ती बढ़ा दी, लेकिन असली खतरा कितना करीब है, यह अब भी रहस्य बना हुआ है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 14 April 2026, 3:32 PM IST

Balrampur: बलरामपुर की तराई क्षेत्र में इन दिनों एक अदृश्य खतरा लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। तेंदुए की संभावित मौजूदगी ने प्रशासन और वन विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड में ला दिया है। जैसे ही बनगंवा के पास तेंदुए के पगमार्क मिलने की पुष्टि हुई, पूरे इलाके में हलचल तेज हो गई और निगरानी व्यवस्था को तत्काल सख्त कर दिया गया।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, भाभर रेंज और उससे जुड़े संवेदनशील गांवों में वन विभाग ने दो विशेष टीमें गठित कर दी हैं। इन टीमों ने रेहरा, बेलभरिया, परसरामपुर और पिपरा सडवा गांवों में 5 से 6 किलोमीटर तक पैदल ट्रैकिंग कर पगमार्क की गहन जांच की। जांच के दौरान मिले संकेतों ने यह साफ कर दिया कि खतरा टला नहीं है, बल्कि और सतर्कता की जरूरत है।

ड्रोन कैमरे से हो रही निगरानी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी शुरू कर दी गई है। सुबह 6 से 9 बजे और शाम के समय वन विभाग की टीमें नियमित कॉम्बिंग कर रही हैं ताकि किसी भी हलचल को तुरंत पकड़ा जा सके। कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं, जिनकी मदद से तेंदुए की सटीक लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।

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जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने कलेक्ट्रेट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पचपेड़वा, गैंसड़ी, हरैया सतघरवा और तुलसीपुर ब्लॉकों के ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने वन और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से काम करने के सख्त निर्देश दिए और हर स्तर पर सतर्कता बरतने को कहा।

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अहम कदम उठाए गए हैं। लेखपाल और वन रक्षक लगातार गांवों में भ्रमण कर रहे हैं। स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई वन्यजीव आबादी में प्रवेश न कर सके।

प्रशासन ने नदी-नालों के पास अकेले जाने पर रोक लगा दी है, क्योंकि पानी की तलाश में वन्यजीव अक्सर इन इलाकों में आते हैं। साथ ही, शाम के समय वन क्षेत्र से सटे गांवों में पटाखे फोड़ने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवाज से वन्यजीव दूर रहें। रेहरा और परसुरामपुर जैसे संवेदनशील गांवों में ड्रोन से लगातार नजर रखी जा रही है। बैनर, पोस्टर, ई-रिक्शा और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि उन्हें क्या करना है और किन बातों से बचना है।

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वन विभाग ने ग्राम प्रधानों के सहयोग से चौपाल और गोष्ठियों का आयोजन शुरू कर दिया है। इसमें ग्रामीणों को महुआ बीनने, पशु चराने या लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जंगल में न जाने की सख्त सलाह दी जा रही है।

साथ ही, विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और लोगों से अपील की है कि अगर कहीं तेंदुआ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे, तो तुरंत सूचना दें।

हेल्पलाइन नंबर जारी

डीएफओ ने जनमानस से अपील की है कि वन क्षेत्र में प्रवेश न करें। तेंदुआ या अन्य वन्यजीव दिखने पर तत्काल सूचना दें। भांभर: 7570048066 रामपुर: 8887852844  तुलसीपुर: 9517170830 बरहवा: 8400293292  बनकटवा: 9919248813  पूर्वी सोहेलवा: 8299660750 पश्चिमी सोहेलवा: 9899614259 उप प्रभागीय वनाधिकारी तुलसीपुर: 8318250149

Location :  Balrampur

Published :  14 April 2026, 3:32 PM IST