
नर्सिंग होम में मरीज की मौत पर फूटा गुस्सा
Badaun: जनपद में इलाज के नाम पर लूट और लापरवाही के आरोपों से घिरा बदायूं का रामा नर्सिंग होम एक बार फिर सुर्खियों में है। 11 दिन तक वेंटिलेटर पर संघर्ष कर रहे एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल परिसर रणभूमि में तब्दील हो गया। गुस्साए परिजनों ने मृतक का शव गेट पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि विरोध कर रहे लोगों पर अस्पताल के स्टाफ ने छत से ईंट-पत्थर बरसा दिए। घटना के बाद से इलाके में तनाव है और नर्सिंग होम के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है।
यह दर्दनाक कहानी अलापुर थाना क्षेत्र के गांव उपरैला निवासी 35 वर्षीय राजवीर पुत्र शेर सिंह की है। 11 दिन पहले छत से गिरने के कारण राजवीर के सिर में गंभीर चोट आई थी। परिजन उसे लेकर आनन-फानन में इंदिरा चौक स्थित रामा नर्सिंग होम पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग होम के संचालक डॉ. बी.आर. गुप्ता ने ऑपरेशन का भरोसा देकर भर्ती किया। 11 दिन तक राजवीर वेंटिलेटर पर रहा। इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर 5 लाख 50 हजार रुपये मांगे। मजबूर परिवार ने अपनी पैतृक जमीन बेचकर यह रकम जमा की। लेकिन आरोप है कि इतनी बड़ी रकम और 11 दिन की देखरेख के बाद भी मरीज के घाव में कीड़े पड़ गए।
जब परिजनों ने डॉक्टर से सवाल किया तो उन्हें डांटकर भगा दिया गया। 11वें दिन अचानक अस्पताल ने मरीज को "हायर सेंटर रेफर" करने की बात कहकर बाहर निकाल दिया। अस्पताल से निकलते ही राजवीर ने दम तोड़ दिया।
हंगामे के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात
मृत्यु की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने राजवीर के शव को रामा नर्सिंग होम के मुख्य गेट पर रख दिया और "न्याय दो, दोषियों पर कार्रवाई करो" के नारे लगाने लगे। परिजनों का गंभीर आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान अस्पताल के अंदर से और ऊपर की मंजिल से स्टाफ ने उन पर ईंट और पत्थरों की बारिश कर दी। भगदड़ में कई लोग बाल-बाल बचे।
घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मशक्कत के बाद परिजनों को शांत कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू की। खबर लिखे जाने तक नर्सिंग होम के बाहर परिजन, ग्रामीण और पुलिस फोर्स का जमावड़ा लगा हुआ था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामा नर्सिंग होम का यह पहला कारनामा नहीं है। कुछ दिन पहले ही एक अन्य मरीज के बिल को लेकर तीमारदारों के साथ मारपीट और गाली-गलौज का मामला सामने आया था। तब भी तीन परिजनों पर हमले और पथराव का आरोप लगा था।
बार-बार शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों के बाद भी अस्पताल पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह प्रशासन की शह पर चल रहा है या किसी सियासी संरक्षण का मामला है?
सिविल लाइन थाना प्रभारी ने बताया कि हमें सूचना मिली थी। मौके पर जाकर स्थिति नियंत्रित की गई। परिजनों से तहरीर ली जाएगी। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
राजवीर की पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है की हमने सब कुछ बेचकर इलाज कराया। सोचा था जान बच जाएगी। लेकिन लापरवाही के कारण सब खत्म हो गया। अब हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए। जो भी दोषी है उसे जेल भेजा जाए।
Location : Badaun
Published : 29 July 2026, 11:54 PM IST