राम मंदिर ट्रस्ट को पहले ही मिला था अलर्ट! 2020 ऑडिट में उजागर हुई थीं कई खामियां… लेकिन चेतावनी के बावजूद नहीं हुए सुधार

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। 2020 की ऑडिट रिपोर्ट में दान प्रबंधन, आभूषण रिकॉर्ड, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर की गई थीं। रिपोर्ट में सुधार के सुझाव भी दिए गए थे, लेकिन उन पर प्रभावी अमल नहीं हुआ।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 June 2026, 8:59 AM IST

Ayodhya: राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद एक निजी ऑडिट फर्म ने मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कई गंभीर खामियों की पहचान की थी। फर्म ने दान प्रबंधन, आभूषणों के रिकॉर्ड, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए थे, लेकिन उन पर प्रभावी अमल नहीं किया गया। अब चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर नए सवाल उठने लगे हैं।

दान प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था में मिली थीं कमियां

सूत्रों के मुताबिक नवंबर 2020 में ट्रस्ट की आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था का परीक्षण करने की जिम्मेदारी एक निजी ऑडिट फर्म को सौंपी गई थी। जांच के दौरान फर्म ने पाया कि दान और वित्तीय लेन-देन के रखरखाव के लिए कोई मजबूत और व्यवस्थित प्रणाली मौजूद नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक अभिलेखों का अभाव है और प्रबंधन की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था भी विकसित नहीं की गई है।

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फर्म ने चेतावनी दी थी कि यदि इन कमियों को समय रहते दूर नहीं किया गया तो भविष्य में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

एसओपी लागू करने की दी गई थी सलाह

ऑडिट रिपोर्ट में ट्रस्ट को स्पष्ट रूप से सलाह दी गई थी कि वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए। रिपोर्ट के अनुसार बिना एसओपी के किसी भी संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना कठिन होता है।

फर्म ने लेन-देन, डेटा प्रबंधन, मानव संसाधन और रिकॉर्ड संधारण के लिए विस्तृत एसओपी लागू करने की सिफारिश की थी। इसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की संभावना को कम करना था।

चढ़ावे के जेवरात और रिकॉर्ड को लेकर जताई थी चिंता

ऑडिट फर्म ने सबसे गंभीर टिप्पणी मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि नकदी के अलावा मिलने वाले दान के लिए समुचित स्टॉक रजिस्टर तैयार किया जाना चाहिए और उसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसके साथ ही बैंक समन्वयन और वित्तीय निगरानी के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया था। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि वित्तीय नियंत्रण को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति की जाए।

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डेटा सुरक्षा और आईटी नियंत्रण पर भी उठाए गए थे सवाल

रिपोर्ट में डेटा सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियंत्रण को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई थी। ऑडिट फर्म के अनुसार संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा, डेटा एंट्री की निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए पर्याप्त नियंत्रण तंत्र मौजूद नहीं था। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो सकते थे।

एसआईटी जांच में अहम दस्तावेज बन सकती है रिपोर्ट

चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में वर्ष 2020 की यह ऑडिट रिपोर्ट जांच एजेंसी के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन खामियों की ओर छह वर्ष पहले ही संकेत कर दिया गया था, उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। साथ ही यह भी जांच का विषय बन सकता है कि सुधार के दावे वास्तव में लागू हुए थे या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गए।

Location :  Ayodhya

Published :  25 June 2026, 8:59 AM IST