इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, अब इस अधिकारी के आदेश के बिना नहीं बनेगा मृत्यु प्रमाणपत्र

Allahabad High Court ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर नहीं कराया गया हो तो मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एसडीएम का आदेश जरूरी होगा। कोर्ट ने इस मामले में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 May 2026, 6:37 PM IST
Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मौत का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर नहीं कराया गया है तो बाद में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए संबंधित एसडीएम का आदेश अनिवार्य होगा। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने पत्नी का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

1962 में हुई थी शादी

मामला वाराणसी निवासी नवल किशोर से जुड़ा है। याचिका के अनुसार उनका विवाह वर्ष 1962 में माधुरी नाम की महिला से हुआ था। कुछ समय बाद पत्नी अपने मायके चली गई और फिर वापस नहीं लौटी। याची का दावा था कि वर्ष 2001 में रामनगर स्थित मायके में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। बाद में उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी।

दूसरी पत्नी का नाम दर्ज कराने में आई दिक्कत

बताया गया कि याची भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने सरकारी और अन्य दस्तावेजों में दूसरी पत्नी का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान अधिकारियों ने पहली पत्नी का मृत्यु प्रमाणपत्र मांगा। इसके बाद याची ने नगर निगम में आवेदन देकर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की।

पार्षद के प्रमाणपत्र को नहीं माना वैध

याची ने आवेदन के साथ पार्षद द्वारा जारी प्रमाणपत्र और शपथ पत्र भी लगाया था। हालांकि नगर निगम ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि Registration of Births and Deaths Act 1969 और उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली-2002 के तहत एक वर्ष से अधिक समय बाद मृत्यु पंजीकरण कराने के लिए एसडीएम की अनुमति जरूरी होती है।

कोर्ट ने सरकार की दलील मानी सही

खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन ने राज्य सरकार की दलीलों को सही माना। अदालत ने कहा कि किसी पार्षद द्वारा जारी प्रमाणपत्र या व्यक्ति के स्वयं के शपथ पत्र को मृत्यु का पर्याप्त और वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है और बिना एसडीएम आदेश के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता।

Location :  Prayagraj

Published :  16 May 2026, 6:37 PM IST