यूपी से बड़ी खबर: चार हजार मदरसों की जांच पर हाईकोर्ट की मुहर, फैसले के बाद मचा हड़कंप

वाराणसी के मदरसों की ATS जांच के खिलाफ दायर याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच शुरू होना किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि खुफिया इनपुट के आधार पर प्रदेश के करीब 4 हजार संस्थानों की जांच कराई जा रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 July 2026, 4:11 PM IST

Varanasi : जिले के मदरसों की एटीएस जांच को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि किसी संस्थान के खिलाफ जांच शुरू किया जाना अपने आप में दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश में खुफिया एजेंसियों की ओर से चल रही जांच पहले की तरह जारी रहेगी।

एटीएस जांच पर रोक लगाने की मांग नहीं मानी

मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जो 9 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। इस आदेश के तहत प्रदेश के मदरसों की एटीएस से जांच कराए जाने का फैसला लिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह जांच उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से कराई जा रही है और इसके आधार पर भविष्य में उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

सरकार ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई किसी विशेष संस्थान को निशाना बनाने के लिए नहीं की जा रही है। सरकार के मुताबिक खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 4 हजार संस्थानों की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य सुरक्षा से जुड़े तथ्यों की जांच करना और आवश्यक जानकारी जुटाना है।

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हाईकोर्ट ने कही अहम बात

जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि केवल जांच शुरू होना किसी भी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ सजा या दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

जांच समिति के सामने जवाब देने की छूट

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। अदालत ने कहा कि जांच प्रक्रिया कानून के दायरे में आगे बढ़ेगी और संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। ऐसे में फिलहाल एटीएस जांच पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

Location :  Varanasi

Published :  3 July 2026, 4:10 PM IST