
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने की पीड़ित परिवार से मुलाकात (सोर्स- एक्स)
Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद में बदल चुका है। घटना के करीब डेढ़ महीने बाद इस पूरे मामले पर सियासत बेहद तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और उन्हें न्याय दिलाने का पूरा भरोसा दिया है।
अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरा है। उन्होंने मांग की है कि भाजपा सरकार पीड़ित परिवार की हर जायज मांग को तुरंत पूरा करे और मृतक बेटी को हर हाल में न्याय मिले। सपा प्रमुख ने साफ किया कि न्याय की इस लड़ाई में वे और उनकी पार्टी पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर विपक्ष लगातार उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमलावर है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और आजाद समाज पार्टी के मुखिया व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। नेताओं ने पुलिस की हालिया कार्रवाई और रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। इसी सिलसिले में शुक्रवार को जब चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ जा रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें सिवाया टोल प्लाजा पर ही रोक दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया।
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यह पूरा मामला मेरठ के टीपी नगर क्षेत्र के गगन एनक्लेव का है। यहाँ रहने वाली 20 वर्षीय ललिता गौतम बीए की छात्रा थी। बीते 15 मई को वह कॉलेज में परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद जब उसका कुछ पता नहीं चला, तो परेशान परिजनों ने 16 मई को टीपी नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश शुरू की और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो ललिता कल्याणपुर गांव के रहने वाले अंकुश नाम के एक युवक के साथ जाती हुई दिखाई दी। पुलिस ने शक के आधार पर अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा हुआ।
पीड़ित परिवार से बातचीत करते सपा प्रमुख (सोर्स- एक्स)
पुलिस पूछताछ में आरोपी अंकुश ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक, अंकुश और ललिता पहले से एक-दूसरे को जानते थे और रिश्ते में थे। घटना वाले दिन यानी 15 मई को दोनों साथ थे। अंकुश को ललिता पर किसी और से बात करने का शक था। मुलाकात के दौरान अंकुश ने ललिता के फोन में कुछ तस्वीरें और चैट देख लीं, जिसे लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। गुस्से और आवेश में आकर अंकुश ने ललिता की हत्या कर दी और पहचान छुपाने के लिए उसके शव को उपसिया जंगल के एक गन्ने के खेत में फेंक दिया। पुलिस ने 17 मई को ललिता का शव बरामद कर लिया था।
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ललिता की मौत के करीब डेढ़ महीने बाद इस मामले ने दोबारा तूल पकड़ लिया है। दलित समाज के विभिन्न संगठनों का आरोप है कि इस हत्याकांड में कुछ और लोग भी शामिल हैं, जिनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हाल ही में संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस का दावा है कि कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार को बहला-फुसलाकर ज्ञापन देने के बहाने कलेक्ट्रेट के बाहर इकट्ठा किया, जिसने बाद में उग्र धरने का रूप ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना इजाजत के सड़क जाम की और हिंसक होते हुए जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय का गेट तोड़ दिया। स्थिति को काबू में करने के लिए मेरठ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसक झड़प में पुलिस के कई जवान भी जख्मी हुए हैं।
कलेक्ट्रेट के बाहर हुए इस उग्र प्रदर्शन और सड़क जाम के बाद मेरठ पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पुलिस ने इस मामले में 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही, माहौल बिगाड़ने और हिंसा करने के आरोप में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है, वहीं विपक्षी दल लगातार पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
Location : Meerut
Published : 11 July 2026, 10:29 AM IST
Topics : Akhilesh Yadav Dalit Student Murder UP Lalita Gautam Murder Meerut Murder Case Samajwadi Party