अमेठी में कबाड़ व्यापारी के अपहरण और रंगदारी वसूली मामले का पुलिस ने खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साढ़े चार लाख रुपये कैश, फर्जी नंबर प्लेट और कारतूस बरामद हुए हैं।

आरोपियों को गिरफ्तार करके पुलिस ने किया खुलासा
अमेठी में कबाड़ व्यापारी के अपहरण और रंगदारी वसूली के मामले ने ऐसा मोड़ लिया कि शुरुआती जांच में खुद पीड़ित ही खामोश रहा। अपराधियों का डर इतना था कि वह उनके नाम तक नहीं बता पाया। पांच दिन बाद पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए अंतरजनपदीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और साढ़े चार लाख रुपये से ज्यादा नकदी बरामद की।
स्कूल से लौटते समय किया था अपहरण
मामला अमेठी के मुसाफिरखाना क्षेत्र का है। पीड़ित रमन कुमार अग्रहरि ने बताया कि 10 फरवरी की सुबह बेटे को धरौली स्कूल छोड़कर लौटते समय शुक्ला पेट्रोल पंप के पास चार लोगों ने उसे रोक लिया। जबरन सफेद कार में बैठाकर ले गए और जान से मारने की धमकी देकर आठ लाख रुपये वसूल कर छोड़ा। इस मामले में पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
पहचान के बावजूद खामोश रहा पीड़ित
जांच में सामने आया कि आरोपी पीड़ित के परिचित ही थे और पड़ोसी गांव से जुड़े थे। मुख्य आरोपी महेश सिंह शातिर अपराधी बताया गया, जिससे डरकर पीड़ित ने शुरुआती पूछताछ में नाम नहीं बताए। इसी वजह से पुलिस भी पहले घटना को संदिग्ध मानती रही और चार दिन बाद मुकदमा दर्ज हुआ।
चेकिंग में दबोचे गए आरोपी, बड़ी बरामदगी
पुलिस अधीक्षक सरवणन टी के निर्देश पर स्वाट टीम और स्थानीय पुलिस ने चेकिंग के दौरान बिना नंबर प्लेट की कार सवार अनुज प्रताप सिंह उर्फ मुरारी सिंह और घनश्याम पाण्डेय को गिरफ्तार किया। तलाशी में उनके पास से चार लाख पैंतालीस हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन, 315 बोर का कारतूस, फर्जी नंबर प्लेट और पहचान पत्र बरामद हुए।
पांच आरोपियों ने मिलकर रची थी साजिश
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। अपहरण के लिए फर्जी नंबर प्लेट वाली कार का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पहचान न हो सके। पुलिस के अनुसार गिरोह ने इसी तरह की वारदात अयोध्या में भी की थी, जहां दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
खाते सीज, आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस ने घटना से जुड़े 85 हजार रुपये आरोपियों के खाते में सीज कर दिए हैं और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। पूरे मामले का खुलासा करने वाली टीम को पुलिस अधीक्षक ने पुरस्कृत भी किया है।