इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल किसी का नाम शामिल होने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती। ठोस आरोप और साक्ष्य के बिना पति के रिश्तेदारों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
गोरखपुर महिला थाना स्थित परिवार परामर्श केन्द्र की संवेदनशील काउंसलिंग से पति-पत्नी के बीच चल रहे मतभेद दूर हुए और एक परिवार टूटने से बच गया।