TRAI CNAP Rule: अब अनजान कॉल पर नंबर के साथ दिखेगा नाम, 1 नवंबर से बदल सकता है फोन इस्तेमाल करने का तरीका

TRAI CNAP Rule: 1 नवंबर 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सेवा लागू करने के निर्देश जारी हुए हैं। अनजान कॉल पर नंबर के साथ नाम दिख सकता है। जानें Truecaller से यह कैसे अलग है, 2G-3G यूजर्स को कब मिलेगी सुविधा और फ्रॉड से कैसे बचें।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 15 October 2026, 1:32 PM IST
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New Delhi: मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आते ही सबसे बड़ा सवाल होता है कि कॉल किसने किया है। कई बार लोग जरूरी कॉल समझकर फोन उठा लेते हैं, लेकिन दूसरी तरफ से ठगी की कोशिश शुरू हो जाती है। अब ऐसी कॉल की पहचान करने में मदद के लिए नई व्यवस्था लागू होने जा रही है।

दूरसंचार विभाग (DoT) के 13 अक्टूबर 2026 के निर्देश के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर से देशभर में कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा शुरू करनी होगी। इसके तहत कॉल आने पर नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी दिखाया जा सकेगा।

1 नवंबर से क्या बदलेगा?

CNAP का उद्देश्य फोन पर कॉल करने वाले की पहचान दिखाना है। अब तक अनजान नंबर से कॉल आने पर कई यूजर्स नाम जानने के लिए Truecaller जैसे ऐप का इस्तेमाल करते हैं। नई व्यवस्था में टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी जानकारी दिखाई जाएगी। DoT के निर्देश के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को यह सेवा सभी सेवा क्षेत्रों में लागू करनी है। ग्राहकों के लिए इसे डिफॉल्ट रूप से चालू रखने का भी निर्देश दिया गया है।

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स्क्रीन पर किस नाम को प्राथमिकता मिलेगी?

CNAP में नाम दिखाने की प्रक्रिया तय प्राथमिकता के अनुसार होगी। अगर कॉल करने वाले का नंबर आपके फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव है, तो पहले उसी में दर्ज नाम दिखेगा। नंबर सेव नहीं होने पर घरेलू कॉल के लिए ग्राहक आवेदन फॉर्म या संबंधित सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज नाम अथवा स्वीकृत नाम दिखाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय कॉल के मामले में स्क्रीन पर “International Call” दिखाने का प्रावधान है। इससे विदेश से आने वाली कॉल की पहचान करना आसान हो सकता है।

क्या Truecaller की जरूरत खत्म हो जाएगी?

CNAP आने के बाद कॉलर की पहचान के लिए हर बार किसी थर्ड-पार्टी ऐप पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Truecaller जैसे ऐप तुरंत बेकार हो जाएंगे। CNAP और ऐसे ऐप्स की पहचान दिखाने की प्रक्रिया अलग है। CNAP टेलीकॉम रिकॉर्ड पर आधारित जानकारी दिखाता है, जबकि दूसरे ऐप अपने उपलब्ध डेटा और सेवाओं के आधार पर जानकारी देते हैं।

2G और 3G यूजर्स को करना होगा इंतजार

नई व्यवस्था के शुरुआती चरण में वायरलेस 2G और 3G नेटवर्क तथा लैंडलाइन पर CNAP लागू करने का मामला अलग से देखा जाएगा। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि 1 नवंबर से हर तरह के फोन और नेटवर्क पर यह सुविधा एक साथ उपलब्ध होगी।

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क्या इससे साइबर फ्रॉड पूरी तरह रुक जाएगा?

कॉलर का नाम दिखने से अनजान कॉल को समझने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे ठगी से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं मानना चाहिए। नाम या नंबर देखकर किसी कॉल पर आंख बंद करके भरोसा न करें। बैंक खाते की जानकारी, OTP, पासवर्ड या निजी विवरण फोन पर साझा न करें। यदि कोई खुद को बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो कॉल काटकर संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर से संपर्क करें। CNAP पहचान की एक अतिरिक्त मदद है, सतर्कता का विकल्प नहीं।

Location :  New Delhi

Published :  15 October 2026, 1:32 PM IST

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