अब हर डिजिटल लेनदेन को मिलेगा रिस्क स्कोर, म्यूल अकाउंट और साइबर ठगी पर होगी सख्ती

साइबर ठगी और म्यूल अकाउंट्स पर रोक लगाने के लिए आरबीआई इनोवेशन हब नई रिस्क स्कोर प्रणाली ला रहा है। इसके तहत डिजिटल लेनदेन को रियल-टाइम जोखिम स्तर दिया जाएगा। बैंक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त जांच और निगरानी कर सकेंगे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 May 2026, 9:34 AM IST

New Delhi: देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों को रोकने के लिए अब डिजिटल लेनदेन को रियल-टाइम यानी उसी समय ‘रिस्क स्कोर’ दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य म्यूल अकाउंट्स और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहचान कर साइबर अपराधों पर लगाम लगाना है।

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध रूप से कमाए गए पैसों को छिपाने, ट्रांसफर करने और धनशोधन जैसी गतिविधियों के लिए करते हैं। डिजिटल भुगतान व्यवस्था में तेजी से बढ़ रही धोखाधड़ी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने इस दिशा में नई पहल शुरू की है।

आईडीपीआईसी करेगा पूरी व्यवस्था का संचालन

डिजिटल लेनदेन को जोखिम स्कोर देने की यह व्यवस्था आरबीआई इनोवेशन हब की परियोजना का दूसरा चरण है। इसे इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (आईडीपीआईसी) के जरिए लागू किया जाएगा।

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आईडीपीआईसी कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत गठित संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ते डिजिटल भुगतान नेटवर्क में होने वाली धोखाधड़ी का वास्तविक समय में पता लगाना, उसे रोकना और उसका विश्लेषण करना है।

आईडीपीआईसी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के सत्यनारायण राजू ने कहा कि जब तक म्यूल अकाउंट्स के खुलने पर रोक नहीं लगेगी, तब तक साइबर धोखाधड़ी पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल रहेगा। उन्होंने कहा कि अवैध पैसों का लेनदेन ज्यादातर इन्हीं खातों के जरिए किया जाता है।

‘म्यूलहंटरडॉटएआई’ टूल से बनेगी संदिग्ध खातों की रजिस्ट्री

आरबीआई इनोवेशन हब ने इससे पहले ‘म्यूलहंटरडॉटएआई’ नामक टूल विकसित किया था। इसका उद्देश्य संदिग्ध बैंक खातों की एक साझा रजिस्ट्री तैयार करना है।

इस प्रणाली के तहत यदि कोई बैंक किसी मनी म्यूल खाते की पहचान करता है, तो उसकी जानकारी रजिस्ट्री में सुरक्षित रखी जाएगी और अन्य बैंकों के साथ साझा की जाएगी। अभी तक चार सार्वजनिक क्षेत्र के और दो निजी क्षेत्र के बैंक इस रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

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लेनदेन को मिलेगा कम, मध्यम और अधिक जोखिम स्तर

परियोजना के दूसरे चरण में आरबीआई इनोवेशन हब ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो हर डिजिटल लेनदेन का तत्काल जोखिम मूल्यांकन करेगा।

इस व्यवस्था के तहत यह पता लगाया जाएगा कि भुगतान कौन कर रहा है, लाभार्थी कौन है और दोनों का जोखिम स्तर क्या है। जोखिम को कम, मध्यम और अधिक श्रेणियों में बांटा जाएगा।

कम जोखिम वाले खातों में लेनदेन तुरंत पूरा हो जाएगा, जबकि मध्यम जोखिम वाले मामलों में कुछ देरी हो सकती है। वहीं अधिक जोखिम वाले ट्रांजैक्शन में बैंक अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे और जरूरत पड़ने पर दस्तावेज या अन्य प्रमाण भी मांग सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  18 May 2026, 9:34 AM IST