गाजियाबाद में ऑनलाइन लव गेम के टास्क से जुड़ी तीन बहनों की आत्महत्या ने डिजिटल दुनिया के खतरनाक पहलू को उजागर किया है। Gen-Z में ऑनलाइन लव गेम्स का बढ़ता क्रेज मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

ऑनलाइन लव गेम्स की ओर खींचता जेन-जी (Img: Google)
New Delhi: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। एक ऑनलाइन लव गेम से जुड़े टास्क के दबाव के कारण तीन बहनों के सुसाइड की खबर ने डिजिटल दुनिया के काले सच को सामने ला दिया है। ये एक ऐसा विषय जिस पर अब तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया था।
यह मामला सिर्फ एक परिवार के लिए त्रासदी नहीं है, बल्कि Gen-Z के बीच तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन लव गेम्स और उनके खतरनाक मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में एक चेतावनी है।
ऑनलाइन लव गेम्स आमतौर पर मोबाइल ऐप्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या चैट गेम्स के रूप में होते हैं। ये दोस्ती से शुरू होते हैं, फिर इमोशनल जुड़ाव में बदलते हैं और धीरे-धीरे "टास्क" देते हैं। ये टास्क पर्सनल जानकारी शेयर करने से लेकर मानसिक दबाव बनाने, इमोशनल ब्लैकमेल या खतरनाक स्थितियों तक हो सकते हैं। ये गेम्स धीरे-धीरे यूजर्स के विचारों और कामों पर कंट्रोल कर लेते हैं।
Gen-Z, 1997 के बाद पैदा हुई पीढ़ी, डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल रिश्ते उनकी रोजाना की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस पीढ़ी की इमोशनल एक्सेप्टेंस की गहरी जरूरत, अकेलेपन और तुलना की आदत और तुरंत संतुष्टि और तुरंत जवाब की आदत उन्हें ऐसे ऑनलाइन लव गेम्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती है।
शुरू में, टास्क काफी सीधे-सादे होते हैं, जैसे किसी से बात करना, देर रात तक ऑनलाइन रहना या भावनाएं जाहिर करना। धीरे-धीरे, ये टास्क मानसिक दबाव, डर और क्राइम के विचार पैदा करने लगते हैं। कुछ मामलों में, गेम ऑपरेटर या दूसरा व्यक्ति पार्टिसिपेंट्स को यकीन दिलाता है कि "अगर टास्क पूरा नहीं किया तो कुछ बुरा होगा।" यहीं से असली खतरा शुरू होता है।
ऑनलाइन लव गेम्स की ओर खींचता जेन-जी (Img: Google)
गाजियाबाद की घटना यह सवाल भी उठाती है कि क्या हम अपने बच्चों की डिजिटल जिंदगी पर ठीक से नजर रख रहे हैं। अक्सर, माता-पिता अपने बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सिर्फ टाइम पास मानते हैं, लेकिन वे कंटेंट और उसके इमोशनल असर को नजरअंदाज कर देते हैं।
ऐसे में माना जाता है कि बच्चों के साथ खुलकर बातचीत जरूरी है। ऑनलाइन एक्टिविटीज के बारे में डर नहीं, भरोसे का माहौल बनाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही अहमियत देनी चाहिए।
ऑनलाइन लव गेम का खौफनाक अंजाम! गाजियाबाद की तीन सगी बहनों ने एकसाथ उठाया खौफनाक कदम
डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ परिवारों को ही नहीं, बल्कि सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। ऐसे ऐप्स और गेम्स की मॉनिटरिंग, सख्त नियम और समय पर चेतावनी सिस्टम बहुत जरूरी हो गए हैं। स्कूल और कॉलेज लेवल पर डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा को सिलेबस का हिस्सा बनाने की मांग भी बढ़ रही है।
गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है कि ऑनलाइन दुनिया, जो बहुत आकर्षक है, वह बहुत खतरनाक भी हो सकती है।