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नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा भगवान राम की नगरी अयोध्या में पांच एकड़ क्षेत्रफल में मस्जिद निर्माण के लिए गठित कमेटी में कोई भी सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट की इस मांग से जुड़ी एक जनहति याचिका को आज खारिज कर दिया है।
इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मस्जिद निर्माण कमेटी में सरकारी नुमाइंदों को शामिल करने की मांग की थी। याचिका मं कहा गया था कि जिस तरह राम जन्मभूमि ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिधि शामिल किये गये हैं, उसी तरह मस्जिद के ट्रस्ट में भी सरकारी नुमाइंदों को शामिल किया जाना चाहिये।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रस्ट की यह मांग ठुकरा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस फाउंडेशन में किसी सरकारी नुमाइंदे को शामिल नहीं किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि राम मंदिर की जमीन के बदले यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिये सुप्रीम कोर्ट द्वारा अलग जमीन दी गयी है। यह मस्जिद इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन द्वारा बनाई जायेगी। फाउंडेशन में मौजूद सभी लोग वक्फ बोर्ड के सदस्य हैं।
Published : 4 December 2020, 5:33 PM IST
Topics : अयोध्या इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन मस्जिद निर्माण राम जन्मभूमि ट्रस्ट सरकारी कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट
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