
मध्य प्रदेश: दिसंबर 2024 में भोपाल के मेंडोरी जंगल में लावारिस हालत में मिली कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का रहस्य अभी भी बरकरार है। इस सनसनीखेज मामले ने मध्य प्रदेश में कथित परिवहन घोटाले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस मामले को लेकर विधानसभा में भी खूब हंगामा हुआ, जहां कांग्रेस ने सरकार पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए गंभीर आरोप लगाए और सदन से वॉकआउट कर दिया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक,
होली और रंगपंचमी की छुट्टियों के बाद गुरुवार को विधानसभा सत्र शुरू होते ही कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अनूठा प्रदर्शन किया। महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन ने कुंभकरण का रूप धारण कर सरकार की 'नींद' पर सवाल उठाए, वहीं बाकी विधायकों ने बांसुरी बजाकर सरकार को जगाने की कोशिश की। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।
परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप
सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस ने परिवहन विभाग में अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे प्रतीकात्मक सोने की ईंट लेकर पहुंचे और सरकार से सीधा सवाल पूछा- "मेंडोरी के जंगल में जो कार सोने और नकदी से भरी मिली, वह किसकी थी?" कांग्रेस नेता उमंग सिंघार और हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग के चेक पोस्ट और नाकों पर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की जा रही है।
सीबीआई जांच की मांग
कांग्रेस ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की, लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सदन में हंगामा किया और वाकआउट कर दिया। इस पूरे मामले का केंद्र पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा हैं, जिनके यहां दिसंबर में लोकायुक्त और आयकर विभाग ने छापा मारा था। छापे में 235 किलो चांदी, नकदी और 8 करोड़ रुपये के जेवरात बरामद हुए थे। उसी रात मेंडोरी के जंगल में मिली लावारिस कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे, जिनकी कुल कीमत करीब 40 करोड़ 47 लाख रुपये आंकी गई थी। जांच में पता चला कि कार सौरभ शर्मा के करीबी चेतन सिंह गौर की थी। फिलहाल सौरभ शर्मा, चेतन गौर और शरद जायसवाल न्यायिक हिरासत में हैं।
सरकार की सफाई, कांग्रेस का आरोप
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सौरभ शर्मा की अधिसूचना में सभी कर्मचारी शामिल थे, लेकिन दस्तावेजों की जांच में खामियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और अभी किसी ठोस जांच की जरूरत नहीं है। वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो बड़े नेताओं और अफसरों के नाम सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक विवाद का केंद्र बना मामला
मेंडोरी मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यह मामला न सिर्फ सरकार की कार्यप्रणाली पर बल्कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार सरकार और जांच एजेंसियों की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो पूरा सिंडिकेट बेनकाब हो सकता है।
Published : 20 March 2025, 7:17 PM IST
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